Vaibhav को स्थिति प्रबंधन प्रशिक्षण दिया जाना जरुरी : विशेषज्ञ
मुम्बई। 15 साल के उभरते हुए भारत ए टीम के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने जिस प्रकार से श्रीलंका ए के खिलाफ मुकाबले में टीम की हार के बाद आपा खोया है, उस पर खेल विशेषज्ञों ने चिन्ता जतायी है। इन विशेषज्ञों का मानना है कि विरोधी खिलाड़ी वैभव को उकसाने को प्रयास करेंगे, इस प्रकार की स्थित से किस प्रकार से निपटना है ये उन्हें सिखाना पड़ेगा। इनका मानना है कि वैभव सूर्यवंशी की लोकप्रियता जिस तेजी से बढ़ रही है। उसको देखते हुए अब मैदान पर उनकी एकाग्रता भंग करने विरोधी टीमें छींटाकशी और मनोवैज्ञानिक दांवपेच का भी सहारा ले सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि श्रीलंका में जिस प्रकार त्रिकोणीय टूर्नामेंट में उन्हें उकसाने का प्रयास हुआ है। उसको देखते हुए हालातों से बचने के लिए उन्हें विशेष स्थिति प्रबंधन प्रशिक्षण की तत्काल आवश्यकता है। साथ ही कहा कि मैदान पर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना उन्हें सीखना होगा। तभी उनका अंतरराष्ट्रीय करियर सफल होगा। हाल ही में श्रीलंका-ए के खिलाफ सुपर ओवर में भारत ए की हार के बाद, वैभव सूर्यवंशी और विपक्षी श्रीलंकाई क्रिकेटर विशेन हलाम्बागे के बीच धक्का-मुक्की और तीखी बहस देखी गई थी। यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि युवा वैभव को खेल के मानसिक पहलुओं के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) इसका महत्व को पहले से ही समझती है। यही कारण है कि खिलाड़ियों के शिविर में आने पर उनकी खेल मनोविज्ञान सेवा प्रोफाइल बनाई जाती है। एक मनोवैज्ञानिक के अनुसार उन्होंने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में 18-19 उच्च प्रदर्शन शिविर लगाए हैं जिससे खिलाड़ियों को उनकी मनोस्थिति को समझाने और उस पर काम करने के तरीके तलाशने में सहायता मिल सके। वर्तमान में जिस प्रकार से भारतीय क्रिकेट टीम एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। उससे कई युवा क्रिकेटर टीम में अपनी जगह पक्की करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में, मानसिक तैयारी का महत्व और भी बढ़ जाता है। एक पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ता ने ने भी मानसिक तैयारी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि युवा क्रिकेटरों की प्रतिभा पर कोई संदेह नहीं है, लेकिन कई बार वे अपने करियर में कुछ रिकॉर्ड या उपलब्धियां अर्जित करने की जल्दी में होते हैं। यह जल्दबाजी खतरनाक हो सकती है और इससे अनावश्यक व्यग्रता पैदा होती है।ऐेसे में बीसीसीआई और टीम प्रबंधन को नए खिलाड़ियों को यह समझाने की जरूरत है कि वे जल्दबाजी न करें और उन्हें पूरा समर्थन दिया जाएगा। यह रवैया उन्हें बड़े स्तर पर अच्छा खेलने के लिए मानसिक रूप से तैयार करेगा और उन्हें धैर्य रखने में मदद करेगा।
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