China से दोस्ती के बीच क्यूबा में अमेरिका की बड़ी घेराबंदी
सीआईए प्रमुख ने किया गुप्त दौरा
वॉशिंगटन। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर अच्छे संबंधों का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने चीन, रूस और ईरान के रणनीतिक गढ़ माने जाने वाले क्यूबा की घेराबंदी तेज कर दी है। ट्रंप की इस कूटनीति के बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने अचानक क्यूबा का दौरा किया। रैटक्लिफ ने क्यूबा के गृह मंत्री लाजारो अल्वारेज कासास और पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो के पोते सहित शीर्ष अधिकारियों से सीधी बातचीत की। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप का कड़ा संदेश दिया कि अमेरिका आर्थिक सहयोग के लिए तैयार है, बशर्ते क्यूबा को अपनी नीतियों में बुनियादी बदलाव करने होंगे। अमेरिका क्यूबा से लोकतंत्र की बहाली, राजनीतिक कैदियों की रिहाई, सरकारी उद्योगों के निजीकरण और चीन-रूस के सैन्य अड्डों को बंद करने की मांग कर रहा है। गंभीर ईंधन संकट और रोजाना 20-22 घंटे की बिजली कटौती से जूझ रहे क्यूबा के पास अब विकल्प सीमित हैं। अमेरिका ने उसे वेनेजुएला जैसा सैन्य एक्शन लेने की सख्त चेतावनी दी है। यही वजह है कि क्यूबा जैसे बंद सिस्टम ने न सिर्फ सीआईए प्रमुख का स्वागत किया, बल्कि इस मुलाकात को सार्वजनिक भी किया। क्यूबा ने सफाई दी कि वह अमेरिका के लिए कोई खतरा नहीं है।
इसके साथ ही, अमेरिका 1996 में विमान गिराने के मामले में क्यूबा के 94 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर आपराधिक मुकदमा चलाने की तैयारी भी कर रहा है। चीन के लिए बड़ा झटका यदि क्यूबा अमेरिकी दबाव में झुकता है, तो यह चीन के लिए सबसे बड़ा नुकसान होगा। फ्लोरिडा से महज 151 किलोमीटर दूर स्थित क्यूबा, चीन का सबसे बड़ा जासूसी अड्डा है। चीन यहां के बेजुकल बेस से अमेरिकी सैन्य गतिविधियों, नागरिक और सैटेलाइट संचार की निगरानी करता है। इसके अलावा, क्यूबा में चीन का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव प्रोजेक्ट और बंदरगाहों के आधुनिकीकरण का काम भी चल रहा है। क्यूबा का अमेरिका के नियंत्रण में जाना चीन की पश्चिमी गोलार्ध की खुफिया कूटनीति को पूरी तरह ध्वस्त कर देगा।
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