Meesho का अनोखा मॉडल, बिना कमीशन और इन्वेंट्री के कैसे बढ़ रही कमाई?
- कंपनी ने कम कीमतों और विक्रेता-केंद्रित रणनीति से बनाया अपना रास्ता
नई दिल्ली। जहां पारंपरिक ई-कॉमर्स कंपनियां बड़े डिस्काउंट, भारी गोदामों और विक्रेताओं से कमीशन पर निर्भर करती हैं, वहीं भारतीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मीशो एक अलग राह पर है। कंपनी न तो अपना सामान खरीदती है, न बड़े गोदामों पर पैसा खर्च करती है और न ही विक्रेताओं से बिक्री पर कमीशन लेती है। ऐसे में सवाल उठता है कि मीशो बिना कमीशन और इन्वेंट्री के अपनी कमाई कैसे बढ़ा रहा है और मुनाफे की ओर बढ़ रहा है? मीशो एक ऑनलाइन बाजार की तरह काम करता है, जो ग्राहकों, विक्रेताओं, डिलीवरी पार्टनर और कंटेंट क्रिएटर्स को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है। यह मॉडल एक चक्र बनाता है: जैसे-जैसे ग्राहक बढ़ते हैं, ज्यादा विक्रेता जुड़ते हैं। अधिक विक्रेताओं से सामान की संख्या बढ़ती है और कीमतों में प्रतिस्पर्धा होती है, जिससे और ग्राहक प्लेटफॉर्म पर आते हैं।
मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट इस मॉडल को एक मजबूत वृद्धि चक्र बताती है, जहां एक हिस्से की वृद्धि दूसरे को मजबूत करती है। पारंपरिक ई-कॉमर्स कंपनियों के विपरीत, मीशो विक्रेताओं से प्रोडक्ट लिस्ट करने या बेचने पर कोई कमीशन नहीं लेता। यह जीरो कमीशन मॉडल छोटे विक्रेताओं के लिए प्लेटफॉर्म पर सामान बेचना बेहद आसान और किफायती बनाता है। इसके परिणामस्वरूप, मीशो से 10 लाख से अधिक विक्रेता जुड़े हैं, जो ग्राहकों को कम कीमत पर उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मीशो पर एक ऑर्डर की औसत कीमत लगभग 265 रुपये है, जो दिखाता है कि कम मूल्य के उत्पाद भी आसानी से बिक जाते हैं। यह रणनीति कंपनी को बड़े पैमाने पर ग्राहकों और विक्रेताओं को जोड़ने में मदद करती है, जिससे भविष्य में कमाई के अन्य रास्ते खुलते हैं।
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