अंधेरे में चमकने लगता कैसोवरी Bird के सिर का मुकुट: शोध
न्यूयॉर्क। ऑस्ट्रेलिया और न्यू गिनी के घने वर्षा वनों में पाया जाने वाला कैसोवरी पक्षी से जुड़ा एक हैरान करने वाला रहस्य सामने आया है। शोधकर्ता वैज्ञानिकों के अनुसार, इसके सिर पर मौजूद मुकुट जैसी संरचना अंधेरे में पराबैंगनी (यूवी) प्रकाश पड़ने पर नीले और हरे रंग में चमकने लगती है। कैसोवरी को दुनिया के सबसे खतरनाक पक्षियों में गिना जाता है। यह लगभग एक वयस्क इंसान जितना लंबा हो सकता है और घने जंगलों में भी तेज गति से दौड़ने की क्षमता रखता है। इसके पैरों में खंजर जैसे तीखे नाखून होते हैं, जो गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं। इसके सिर पर एक विशेष संरचना होती है, जिसे वैज्ञानिक “कास्क” कहते हैं। यह हड्डी के ढांचे से बनी होती है और ऊपर से केराटिन नामक पदार्थ से ढकी रहती है। केराटिन वही तत्व है जिससे मनुष्यों के बाल और नाखून बने होते हैं। लंबे समय से वैज्ञानिक इस कास्क के वास्तविक उपयोग को समझने की कोशिश कर रहे थे। कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि यह शरीर की गर्मी नियंत्रित करने, घने जंगलों में आवाज को बढ़ाने या दूसरे पक्षियों को संकेत देने का काम करता है। हालांकि इसका फीका भूरा और काला रंग इन सिद्धांतों को पूरी तरह स्पष्ट नहीं कर पाता था।
हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि यह मुकुट सामान्य रोशनी में भले ही साधारण दिखाई देता हो, लेकिन यूवी प्रकाश के संपर्क में आने पर चमकदार नीले और हरे रंग में बदल जाता है। इस घटना को बायोफ्लोरेसेंस कहा जाता है। इसमें कोई पदार्थ पराबैंगनी प्रकाश को अवशोषित कर उसे दूसरे रंग की रोशनी के रूप में वापस उत्सर्जित करता है। इस रहस्य की जांच के लिए न्यूयॉर्क इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कॉलेज ऑफ ओस्टियोपैथिक मेडिसिन के एनाटॉमिस्ट डॉ. टॉड एल. ग्रीन और उनकी टीम ने व्यापक अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने संग्रहालयों में सुरक्षित रखे गए 95 कैसोवरी सिरों और नौ जीवित पक्षियों पर परीक्षण किए। यूवी लैंप की रोशनी डालने पर उनके कास्क चमकदार रंगों में प्रकाशित हो उठे। शोधकर्ताओं ने तुलना के लिए शुतुरमुर्ग और एमु जैसे पक्षियों पर भी यही प्रयोग किया। इन पक्षियों में ऐसी कोई चमक नहीं मिली, जिससे स्पष्ट हुआ कि यह विशेष गुण केवल कैसोवरी में पाया जाता है।
हालांकि वैज्ञानिक अभी यह निश्चित नहीं कर पाए हैं कि यह चमक दूसरे कैसोवरी पक्षियों के लिए किसी प्रकार का दृश्य संकेत है या फिर यह केवल जैविक संरचना का उप-उत्पाद है। इस खोज का व्यावहारिक महत्व भी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मरने के वर्षों बाद भी कैसोवरी के नमूनों में यह फ्लोरोसेंट पैटर्न बना रहता है। इससे पुराने जीवाश्म और नमूनों की पहचान करना आसान हो सकता है। साथ ही, जंगलों में रहने वाले दुर्लभ कैसोवरी पक्षियों की निगरानी भी अधिक सुरक्षित तरीके से की जा सकेगी। विशेषज्ञों का सुझाव है कि यूवी फ्लैश युक्त ट्रेल कैमरों की मदद से इन पक्षियों की गणना और अध्ययन किया जा सकता है। यह खोज केवल आधुनिक पक्षियों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रागैतिहासिक जीवों के अध्ययन में भी नई संभावनाएं खोलती है। कई वैज्ञानिक कैसोवरी की तुलना मुकुटधारी डायनासोरों से करते हैं। ऐसे में यह संभावना भी जताई जा रही है कि विलुप्त हो चुके कई प्राचीन जीवों में भी ऐसे रंग और चमक मौजूद रहे होंगे, जिनके प्रमाण जीवाश्मों में संरक्षित नहीं रह सके। बता दें कि कैसोवरी पक्षी लंबे समय से अपनी आक्रामक प्रवृत्ति और खतरनाक नाखूनों के कारण वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की रुचि का केंद्र रहा है।
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