भारतीयों के डिपोर्टेशन पर America सख्त, कनाडा में भी 1,500 छात्रों पर संकट, इस साल जून तक 1,076 भारतीय डिपोर्ट
नई दिल्ली। अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के बीच भारतीय नागरिकों के डिपोर्टेशन का मुद्दा फिर चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अगस्त के पहले 15 दिनों में 5,200 से अधिक भारतीयों को अमेरिका से डिपोर्ट किए जाने का दावा किया गया है। इनमें अवैध रूप से रहने वालों के अलावा एच-1बी, ओ-1 और छात्र वीजा पर अमेरिका पहुंचे भारतीयों के मामले भी शामिल बताए जा रहे हैं। अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट की ओर से कार्रवाई तेज किए जाने की बात कही गई है। जून में ही 801 भारतीय नागरिकों को रिमूवल ऑर्डर जारी किए गए थे। हालांकि रिमूवल ऑर्डर जारी होने का अर्थ तत्काल डिपोर्टेशन नहीं होता। संबंधित व्यक्ति इसके खिलाफ अदालत में अपील कर सकता है या स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ सकता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 में 3,567 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था। वहीं जून 2026 तक 1,076 भारतीयों को डिपोर्ट किए जाने की जानकारी दी गई थी। फरवरी 2025 में अमेरिका ने पहली बार सैन्य विमान से 104 भारतीयों को अमृतसर भेजा था। उस दौरान कई लोगों को हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां लगाए जाने की तस्वीरें सामने आई थीं, जिस पर भारत में राजनीतिक विवाद भी हुआ था।
वीजा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई
रिपोर्टों में ऐसे मामलों का भी उल्लेख है, जिनमें वैध वीजा पर अमेरिका पहुंचे लोगों पर नियमों के उल्लंघन के आरोप में कार्रवाई की गई। कुछ मामलों में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर भी कार्रवाई के दावे सामने आए हैं। हालांकि प्रत्येक मामले में डिपोर्टेशन के कारण अलग-अलग हो सकते हैं और अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करती है।
कनाडा में 1,500 भारतीय छात्रों पर बढ़ा संकट
उधर, कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट से जुड़े बदलावों के कारण करीब 1,500 भारतीय छात्रों के सामने अनिश्चितता का संकट आ गया है। ये छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद काम कर रहे थे। प्रभावित छात्रों ने प्रदर्शन कर अपने काम और कनाडा में रहने की स्थिति को स्पष्ट करने की मांग की है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का कहना है कि जिन छात्रों के पास देश में रहने का वैध वीजा या वर्क परमिट नहीं है, उन्हें कनाडा छोड़ना होगा। अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने भी कहा है कि स्टडी वीजा अस्थायी दस्तावेज है और विदेशी छात्र इसके आधार पर स्थायी रूप से कनाडा में रहने का दावा नहीं कर सकते। इस मीडिया रिपोर्ट की जानकारी से यह साबित होता है कि विदेशों में पढ़ाई और रोजगार का विकल्प चुनने वाले भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका और कनाडा में बदलते इमिग्रेशन नियम अब बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।
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