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  • Thursday, 19 March 2026
Bharatanatyam से दिखाए कृष्ण के स्वरूप, तीन ताल में द्रोपदी की पुकार

Bharatanatyam से दिखाए कृष्ण के स्वरूप, तीन ताल में द्रोपदी की पुकार

नगर निगम एवं संस्कार भारती द्वारा कालयुक्तनाम संवत्सर 2082 का विदाई महोत्सव

ग्वालियर। बुधवार की शाम संगीत के सुरों के नाम रही। मौका था जल विहार का, जहां तैरते हुए मंच पर संगीत के सुरों से सजे मंच पर शहर के साथ देश के अन्य क्षेत्रों से आए कलाकारों द्वारा शास्त्रीय गायन,वादन और नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। नगर निगम एवं संस्कार भारती द्वारा कालयुक्तनाम संवत्सर 2082 का विदाई महोत्सव बुधवार को मनाया गया। इस अवसर पर जल विहार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व सांसद  विवेक नारायण शेजवलकर, नगर निगम सभापति श्री मनोज तोमर, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो स्मिता सहस्त्रबुद्धे, भाजपा जिलाध्यक्ष जय प्रकाश राजौरिया, महंत रामसेवक दास महाराज, पार्षद श्री संजीव पोतनिश ,एडिशनल कमिश्नर टी प्रतीक राव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में हुबली से आई हेमा बाघमोड़े और उनके 14 साथियों द्वारा भरतनाट्यम की अद्भुत प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। कुल 35 मिनट की प्रस्तुति का शुभारंभ राग अरभी,ताल मिश्र चापू में पुष्पांजलि से किया, जिसमें हाथों में पुष्प लेकर देवी देवताओं का आह्वान किया गया। इसके बाद रागमालिका , ताल आदिताल में कृष्ण चरितम की अद्भुत प्रस्तुति दी, जिसमें कृष्ण के बाल स्वरूप से लेकर युवा स्वरूप को सौंदर्यता के साथ दर्शाया गया। इस मनोरम प्रस्तुति को देखकर हर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गया। कार्यक्रम की शुरुआत संस्कार भारती के ध्येय गीत से हुई। महोत्सव में काव्य मंजरी, हवाइन गिटार के साथ साथ कथक नृत्य की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। इसके अलावा स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा भी मंच से देखने को मिली।

गत भाव में द्रोपदी की पुकार
नृत्य के क्रम में कथक नृत्य की अद्भुत प्रस्तुति भी देखने को मिली, जिसे जबलपुर से आई वरिष्ठ कलाकार शालिनी खरे ने अपनी शिष्याओं के साथ प्रस्तुत किया। पहली प्रस्तुति विष्णु वंदना से हुई। फिर तीन ताल में तराना की प्रस्तुति में तोड़े, टुकड़े, परन आदि का मनोरम प्रस्तुतीकरण हुआ। इसी क्रम में शालिनी द्वारा तीन ताल में गत भाव की प्रस्तुति में द्रोपदी चीर हरण व पुकार का अद्भुत प्रस्तुतीकरण किया गया।

जिंदगी प्यार का तराना है...
संगीतमय प्रस्तुतियों के बाद काव्य मंजरी का आयोजन हुआ, जिसमें शहर के शहर के साथ प्रदेश के अन्य नगरों से आए कवियों ने काव्य पाठ किया। संचालन सुनीति बैस ने किया।
- हमारी सारी उम्मीदें
अब तुम पर ही टिकी हैं।
संभाल लेना रौद्र—
आते समय
केवल आम्रमंजरियाँ मत लाना,
थोड़ी सद्बुद्धि भी
बिखेरते आना।
जिसमें वसंत की सुगंध हो......
- कुन्दा जोगलेकर


- ज़िंदगी प्यार का तराना है,
इसको हरदम ही गुनगुनाना है।
राह में गुल भले मिले न मिलें,
संग कांटों के भी निभाना है।
-डॉ मुक्ता सिकरवार

- हमेशा रखते हैं रफ्तार अस्सी
प्रभू पहुंचायें इनको घर ठिकाने।
युवाओं पर असर हैता नहीं है
बनाते हैं हज़ारों ये बहाने
______&&&_
मां को आज नहीं मिलती हैं दो रोटी
बेटों की तो सोच हो गयी है छोटी।
वोही खिलाये जिसको पैंशन देती है
उसके बच्चों को ही कपड़े लेती है।
सुनीति बैस ग्वालियर

- आज मौहल्ले में अजीब सी शांति थी
एक अजीब सा इंतज़ार था
गली में छोटे बच्चे जो धूम मचाते थे
आज चुप थे।
रिषभ सिकरवार (उज्जैन)
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ये रहे मौजूद - वरिष्ठ समाजसेवी यशवंत इंदापुरकर, पूर्व महापौर श्रीमती समीक्षा गुप्ता, भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष श्री कमल माखीजानी विशेष रूप से मौजूद रहे। संस्कार भारती की ओर से संभाग प्रमुख शेखर दीक्षित, जिलाध्यक्ष डॉ चंद्रप्रताप सिकरवार सहित प्रदीप दीक्षित, दिनेश चंद्र दुबे आदि मौजूद रहे।

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