खेतों से लेकर फैक्ट्री तक काम करेंगे Chinese Robots
चीन ने खोला दुनिया का पहला रोबोट स्कूल
बीजिंग। चीन ने एक बार फिर अपनी तकनीकी क्षमताओं का लोहा मनवाया है। दुनिया में जहां इंसानी शिक्षा के मॉडल विकसित किए जा रहे हैं, वहीं चीन ने एक नई क्रांति की शुरुआत कर दी है। शंघाई में दुनिया का पहला ह्यूमनॉइड रोबोट ट्रेनिंग सेंटर खुल चुका है, जो अब तक की सबसे अनोखी पहल है। यहां सिर्फ इंसान नहीं, बल्कि 100 से अधिक इंसानों जैसे दिखने वाले रोबोटों को उन सभी कामों का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो हम अपने रोजमर्रा के जीवन में करते हैं। चाहे वह खेत हों या फैक्ट्रियां, घर हों या अस्पताल। यह दर्शाता है कि भविष्य में रोबोट हमारी ज़िंदगी का एक अभिन्न और सक्रिय हिस्सा बनने वाले हैं, और चीन इस बदलाव में सबसे आगे रहना चाहता है।
इस अनूठे प्रशिक्षण केंद्र में रोबोटों को शुरुआत में लगभग 45 बुनियादी काम सिखाए जाएंगे। इनमें सामान्य वस्तुओं को उठाना, पकड़ना, सही जगह पर रखना और एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना शामिल है। ये ऐसे कार्य हैं जो औद्योगिक और घरेलू दोनों ही परिवेशों में अत्यंत आवश्यक होते हैं। धीरे-धीरे उन्हें अधिक जटिल कार्यों के लिए भी तैयार किया जाएगा, जैसे कपड़े मोड़ना, अलमारियां साफ करना, नाजुक गैजेट्स की सफाई करना और अन्य घरेलू व औद्योगिक कार्य। दिलचस्प बात यह है कि इंसानों के लिए आसान लगने वाला टी-शर्ट मोड़ना भी इन रोबोटों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण कामों में से एक माना जाता है, जिस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि वे मानवीय निपुणता के करीब पहुंच सकें।
इस केंद्र का मकसद केवल रोबोटों को प्रशिक्षित करना नहीं है, बल्कि उनके काम करने के तरीके से विशाल मेगा डेटा तैयार करना है। प्रतिदिन यहां से लगभग 50,000 डेटा पॉइंट्स जुटाए जाएंगे, जिसका वार्षिक आंकड़ा 1 करोड़ तक पहुंच जाएगा। यह डेटा किसी खजाने से कम नहीं होगा, क्योंकि इसी की मदद से भविष्य में बनने वाले रोबोट्स को और अधिक समझदार, कुशल और तेजी से सीखने वाला बनाया जा सकेगा। यह एक ऐसा आधार तैयार करेगा जो रोबोटिक्स के भविष्य को पूरी तरह बदल देगा और मशीनों को स्व-शिक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। यह डेटा नई पीढ़ी के रोबोटों के विकास की रीढ़ बनेगा। ट्रेनिंग सेंटर के अधिकारियों के अनुसार, यहां अलग-अलग कंपनियों के रोबोट एक-दूसरे के अनुभवों से भी सीखेंगे, जिससे सभी कंपनियों को अपनी तकनीक बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
इस सहयोगात्मक मॉडल से नए रोबोटों को तैयार करने में लगने वाला समय और लागत, दोनों में उल्लेखनीय कमी आएगी। इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जुटाए गए सभी डेटा को मिलाकर एक सुपर ब्रेन का निर्माण किया जाएगा। इसका अर्थ यह होगा कि किसी एक रोबोट द्वारा सीखा गया ज्ञान या अनुभव सिर्फ उस रोबोट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सुपर ब्रेन के माध्यम से भविष्य में विकसित होने वाले अनगिनत रोबोटों को भी मिलेगा। चीन लंबे समय से रोबोटिक्स के क्षेत्र में अपनी धाक जमा रहा है। देश की कई फैक्ट्रियों में हजारों रोबोट पहले से ही इंसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है। यह नया ट्रेनिंग स्कूल इस दिशा में एक और बड़ा और महत्वाकांक्षी कदम है।
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