थोड़ी ताली और बजाएं, ताकि मैं ट्रंप के साथ नोबेल बांट लूं! भारतीय मूल की पिल्लई ने उड़ाया ट्रंप का मजाक
ओस्लो फ्योर्ड। नॉर्वे की नोबेल समिति ने इस साल यानी 2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख रहीं भारतीय मूल की नवनेथम नवी पिल्लई को विजेता घोषित कर दिया है। 85 वर्षीय दक्षिण अफ्रीकी कानून विशेषज्ञ पिल्लई को शांति और अंतर्राष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने की उनकी कोशिशों के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार दिया गया है। पुरस्कार मिलने के बाद, तमिल मूल की पिल्लई ने ट्रंप को लेकर एक चुटीला मजाक किया। एमनेस्टी इंटरनेशनल के महासचिव द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा, अगर आप थोड़ी और तालियां बजाएं तो हो सकता है कि मैं यह पुरस्कार ट्रंप के साथ बांट लूं! इस पर डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक वकील की पोस्ट शेयर की जिसमें पिल्लई को नफरत करने वाला कहा गया और कहा गया कि इस पुरस्कार का अपमान हुआ है। ट्रंप ने पहले भी कहा था कि उन्हें पुरस्कार मिलने की संभावना कम है, लेकिन बुधवार को उन्होंने फिर कहा कि उन्हें यह पुरस्कार किसी न किसी तरह पहले ही मिल चुका है। उन्होंने अपने कार्यालय में पत्रकारों से कहा, पिछली बार इसे पाने वाले व्यक्ति से अप्रत्यक्ष रूप से इसे प्राप्त करके मुझे बहुत सम्मान महसूस हुआ। वह 2025 की विजेता वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो का जिक्र कर रहे थे। हालांकि, नोबेल कमिटी ने स्पष्ट किया है कि एक बार पुरस्कार दिए जाने के बाद उसे न तो किसी और को सौंपा जा सकता है और न ही बांटा जा सकता है।
समिति के चेयरमैन जोर्गेन वाट्ने फ्राइडनेस ने नॉर्वे के ओस्लो में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि पिल्लई ने युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार के मामलों में मुकदमा चलाने को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है। पिल्लई इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट की पूर्व जज और बाद में संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार मामलों की हाई कमिश्नर रही हैं।इस ऐलान के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निराशा हाथ लगी है, जो कि कई मौकों पर खुद के लिए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की मांग कर चुके हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए भी यह एक झटका है, जिन्होंने इस अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार की घोषणा से कुछ ही घंटे पहले कहा था कि उनके देश ने ट्रंप को इस सम्मान के लिए नामांकित किया है। शहबाज शरीफ ने एक पोस्ट में जोर देकर कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण एशिया में शांति को आगे बढ़ाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनके समय पर किए गए हस्तक्षेप ने पाकिस्तान और भारत को तबाही के कगार से वापस लाने और युद्धविराम सुनिश्चित करने में मदद की, जो कि आज भी कायम है। हालांकि, भारत ने बार-बार कहा है कि कश्मीर में आतंकवादी हमले के जवाब में मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने के बाद दुश्मनी खत्म करने में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी।
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