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  • Wednesday, 07 October 2026
डिजिटल दौर में पत्रकारिता की सबसे बड़ी चुनौती विश्वसनीयता :  Narendra Singh Tomar

डिजिटल दौर में पत्रकारिता की सबसे बड़ी चुनौती विश्वसनीयता : Narendra Singh Tomar

  • भारतीय पत्रकारिता महोत्सव में विधानसभा अध्यक्ष बोले- तकनीक बदली है, लेकिन पत्रकारिता के मूल मूल्य नहीं; क्षेत्रीय भाषाएं जनमानस की असली आवाज

इंदौर। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में खबर तेजी से पहुंच रही है, लेकिन इसी तेजी के बीच पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती विश्वसनीयता बनाए रखना है। मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भारतीय पत्रकारिता महोत्सव में कहा कि तकनीक के साधन बदल सकते हैं, लेकिन पत्रकारिता को अपने मूल्यों, शुचिता और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के दायित्व से नहीं भटकना चाहिए।
तोमर ने कहा कि क्षेत्रीय और भाषाई पत्रकारिता जनमानस की वास्तविक आवाज है। स्थानीय भाषाओं में उठाए गए मुद्दे समाज से सीधे जुड़े होते हैं और उन्हें शासन-प्रशासन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच निष्पक्ष और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की जरूरत और बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारिता की जिम्मेदारी केवल सूचना पहुंचाना नहीं, बल्कि समाज के सामने सही तस्वीर रखना भी है। तकनीक पत्रकारिता को गति दे सकती है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता तथ्य और निष्पक्षता से ही कायम रहती है।
महोत्सव के दूसरे सत्र में तोमर ने देशभर से आए विभिन्न प्रेस क्लबों के अध्यक्षों और वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित किया तथा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में उनके योगदान की सराहना की।
:: सिलावट बोले- युवाओं के हाथ होगी देश के विकास की कमान ::
महोत्सव के तीसरे दिन ‘क्लास रूम के बाहर जेन-जी’ विषय पर आयोजित सत्र में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि आने वाले समय में देश के विकास और प्रगति की कमान युवाओं के हाथ में होगी। भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में है और युवा शक्ति देश की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सिलावट ने मालवा की पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख करते हुए राहुल बारपुते और राजेंद्र माथुर को याद किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी बुनियाद चौथा स्तंभ है और पत्रकार समाज की गलतियों को जनता तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम करते हैं।
:: जेन-जी ने शिक्षा के सामने रखी नई चुनौती ::
मंदसौर विश्वविद्यालय के शोध निर्देशक प्रो. डॉ. आर.के. जैन ने कहा कि जेन-जी इंटरनेट, मोबाइल और सोशल मीडिया की पीढ़ी है। यह पुराने उदाहरणों से संतुष्ट नहीं होती और सवाल करती है। ऐसे में शिक्षकों को भी पढ़ाने के तरीके बदलने होंगे।
उन्होंने कहा कि जेन-जी शिक्षक की केवल तारीफ नहीं करती, बल्कि यह भी बताती है कि क्या छूट गया। एआई का इस्तेमाल गलत नहीं है, लेकिन उसका सही और जिम्मेदार उपयोग समझना जरूरी है।
:: सोशल मीडिया दोधारी तलवार : राघवन
वुमंस प्रेस कॉर्प, नई दिल्ली की अध्यक्ष सुजाता राघवन ने कहा कि जेन-जी डिजिटल मीडिया के साथ पली-बढ़ी पीढ़ी है। उसकी तकनीकी समझ का इस्तेमाल पत्रकारिता के मूल उद्देश्य को पूरा करने में किया जाना चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया को दोधारी तलवार बताते हुए कहा कि पत्रकारिता में सत्य और विश्वसनीयता से समझौता नहीं किया जा सकता। जिन लोगों की आवाज नहीं सुनी जाती, उनकी बात सामने लाना पत्रकारों की जिम्मेदारी है।
:: सोशल मीडिया पोस्ट से खुद खोल रहे साइबर अपराध का रास्ता ::
साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं इंदौर पुलिस अधिकारी राजेश दंडोतिया ने कहा कि जेन-जी इंटरनेट और जेन-अल्फा एआई की पीढ़ी है। सोशल मीडिया पर निजी जानकारी और तस्वीरें साझा कर लोग कई बार खुद ही साइबर अपराधियों को सामग्री उपलब्ध करा देते हैं।
उन्होंने कहा कि डीपफेक के लिए जरूरी सामग्री भी सोशल मीडिया पोस्ट से मिल जाती है। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। देरी होने पर रकम दूसरे माध्यमों से विदेश पहुंच सकती है और उसकी रिकवरी मुश्किल हो जाती है।
:: हर राज्य में जेन-जी के मुद्दे अलग ::
न्यूज18 की एंकर शिवांगी द्विवेदी ने कहा कि पूरे देश की जेन-जी को एक नजरिए से देखना उचित नहीं है। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में युवाओं के मुद्दे अलग हैं। उन्होंने युवाओं से हर सूचना का फैक्ट चेक करने और खुद को लगातार अपडेट रखने की अपील की।
वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सिन्हा ने कहा कि आने वाले वर्षों में जेन-जी देश के उपभोग और निवेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने वित्तीय साक्षरता बढ़ाने पर जोर दिया।

 

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