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Datia उपचुनाव: भाजपा की प्रतिष्ठा, कांग्रेस की चुनौती और बसपा की दस्तक, सबकी नजर नरोत्तम मिश्रा की भूमिका पर

Datia उपचुनाव: भाजपा की प्रतिष्ठा, कांग्रेस की चुनौती और बसपा की दस्तक, सबकी नजर नरोत्तम मिश्रा की भूमिका पर

-अंकुर जैन

दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव अब अंतिम दौर में पहुंच गया है। मतदान में दो दिन शेष हैं और सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस बार चुनाव का सबसे बड़ा चर्चा का विषय भारतीय जनता पार्टी द्वारा पूर्व गृह मंत्री एवं वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाना रहा।

टिकट कटने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और डॉ. मिश्रा के समर्थकों में नाराजगी खुलकर सामने आई। कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए, सड़क जाम किए गए और पार्टी के कुछ पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने इस्तीफे प्रदेश नेतृत्व को भेज दिए। इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी।

स्थिति को संभालने के लिए पार्टी नेतृत्व सक्रिय हुआ। डॉ. नरोत्तम मिश्रा को भोपाल बुलाया गया, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश नेतृत्व और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ उनकी बैठक हुई। इसके बाद डॉ. मिश्रा दिल्ली भी गए, जहां उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात का प्रयास किया। बाद में वे दतिया लौटे और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के नामांकन, रोड शो और चुनाव प्रचार में सक्रिय रूप से शामिल हुए।

उधर कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा है। वहीं बहुजन समाज पार्टी ने दामोदर यादव को उम्मीदवार बनाया है, जो पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। उनके चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय होने की चर्चा भी तेज हो गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा प्रत्याशी की जीत में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका अहम हो सकती है। दूसरी ओर, कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह और डॉ. मिश्रा के पुराने व्यक्तिगत संबंधों की भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा है। ऐसे में चुनाव के अंतिम चरण में डॉ. मिश्रा की सक्रियता और उनके समर्थकों का रुख भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब सभी की निगाहें मतदान और उसके परिणाम पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि दतिया की जनता भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी, कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह और बसपा प्रत्याशी दामोदर यादव में से किसे अपना जनप्रतिनिधि चुनती है तथा क्या चुनाव सीधा मुकाबला रहेगा या तीसरा मोर्चा भी परिणामों को प्रभावित करेगा।

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