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  • Tuesday, 01 September 2026
Nepal में सड़ने लगे शव, महामारी का खतरा बढ़ा, अभियान में आ रही समस्याएं

Nepal में सड़ने लगे शव, महामारी का खतरा बढ़ा, अभियान में आ रही समस्याएं

  • अब तक 960 से ज्यादा लोगों की मौत, 4,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता

काठमांडु। नेपाल और तिब्बत में अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। राहत और बचाव अभियान में नई तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 960 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। भारत में भी बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई कम से कम 17 लाशें बरामद की गई हैं। यह आपदा पिछले बुधवार को चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर के एक बड़े हिस्से के टूटने के बाद शुरू हुई। नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब महामारी का खतरा गहरा गया है। त्रासदी के सात दिन बाद अब शव सड़ने लगे हैं और दुर्गंध फैलने लगी है। मलबे-दलदल में दबे लोगों के शव सड़ने लगे हैं और वजह बताया जा रहा है कि सैनिटेशन के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन रहा है। ऐसे में अब प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू के साथ-साथ सैनिटेशन और महामारी फैलने से रोकने की चुनौती भी एजेंसियों के सामने आ खड़ी हुई है।


नेपाल के रसुवा जिले में करीब 100 जलविद्युत परियोजना कर्मियों के कई सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है। बचाव दल मलबे और गाढ़ी मिट्टी को हटाकर सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक दो सुरंगों से तीन शव बरामद किए जा चुके हैं। नेपाल ने राहत और बचाव कार्यों के लिए करीब 20600 सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को तैनात किया है। अब तक 3100 से ज्यादा लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकाला जा चुका है। नेपाल में अज्ञात शवों के डीएनए सैंपल लेने के बाद उन्हें दफनाया जा रहा है, ताकि भविष्य में उनकी पहचान होने पर शव परिवारों को सौंपे जा सकें। कई परिवार बरामद शवों की तस्वीरें देख रहे हैं और अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील करते हुए कहा है कि शवों को सुरक्षित रखने के लिए उसे 1000 से ज्यादा फ्रीजर यूनिट की जरूरत है। नेपाल में लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक भी हैं। चीन के मुताबिक तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता हैं। वहां 2000 से ज्यादा बचावकर्मी अभियान में जुटे हैं, लेकिन आपदा के सबसे प्रभावित इलाके तक पहुंचना बेहद मुश्किल बना हुआ है। कुछ तिब्बती संगठनों ने चीन की ओर से जारी आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं और अधिक जानकारी की मांग की है. चीन ने मौतों के आंकड़े छिपाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जानकारी ट्रांसपेरेंट है और समय पर जारी की जा रही है।

 

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