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  • Friday, 16 October 2026
उपाधियां प्रतिभा का प्रमाण, राष्ट्र सेवा का संकल्प भी : Governor Patel

उपाधियां प्रतिभा का प्रमाण, राष्ट्र सेवा का संकल्प भी : Governor Patel

  • राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय का सप्तम दीक्षांत समारोह, 67 स्वर्ण पदक और 368 उपाधियां प्रदान

ग्वालियर। राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के सप्तम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि उपाधियां विद्यार्थियों की प्रतिभा का प्रमाण होने के साथ कला और संगीत के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र सेवा का संकल्प भी हैं। शिक्षा तभी शोभायमान होती है, जब उसमें संस्कृति की संवेदना हो। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय कला, संगीत और संस्कृति को विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया। शुक्रवार को राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित समारोह में वर्ष 2024-25 और 2025-26 के विद्यार्थियों को कुल 67 स्वर्ण पदक एवं 368 उपाधियां प्रदान की गईं। इसके अलावा विभिन्न संकायों के 14 शोधार्थियों को शोध उपाधियां दी गईं। समारोह में तानसेन सम्मान से अलंकृत प्रख्यात शास्त्रीय गायक पं. अजय पोहनकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि संस्कृति शिक्षा उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी और प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी रहे। विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे भी मंचासीन रहीं।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि कला और संस्कृति किसी भी राष्ट्र की नींव मजबूत करती हैं। इनके बिना राष्ट्र का विकास अधूरा है। युवा पीढ़ी को विलुप्त हो रहे लोक संगीत एवं कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और अनुसंधान के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में योगदान देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब, वंचित और प्रतिभावान बच्चों की मदद करने की अपील की। उन्होंने ग्वालियर की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़कर तन-मन और आत्मा को निर्मल करने का माध्यम है।

शिक्षा में संस्कार और चरित्र पर जोर

अतुल कोठारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति की गुरुकुल परंपरा में श्रवण, मनन और शिक्षा को जीवन में धारण करने का विशेष महत्व है। विद्यार्थियों को निरंतर सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखने के साथ चरित्र निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि उपाधि प्राप्त करना ज्ञान से साधना, साधना से सृजन और सृजन से राष्ट्र सेवा की ओर बढ़ने का अवसर है। विद्यार्थियों को आधुनिकता अपनाने के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने दीक्षोपदेश देते हुए विद्यार्थियों को सत्य और औचित्य का पालन करने तथा अपने ज्ञान का उपयोग ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के लिए करने का संकल्प दिलाया।

पं. अजय पोहनकर ने बांधा समां

समारोह में पं. अजय पोहनकर ने शास्त्रीय संगीत आधारित भजन और ठुमरी की प्रस्तुति दी। ‘गोविंद जय जय, गोपाल जय जय, राधा रमण हरि गोविंद जय जय’ भजन और ‘कैसी ये भलाई कन्हाई, पनिया भरन मोरी गगरी गिराई’ की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विश्वविद्यालय की छात्राओं ने भरतनाट्यम, कुलगीत और शक्ति आराधना पर आधारित शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया। इस अवसर पर दीक्षांत स्मारिका-2026 का विमोचन भी किया गया।

खगेश कुमार अरसे को मिला स्व. दुर्गा सिंह तोमर स्मृति स्वर्ण पदक

गायन में सर्वोत्तम अंक प्राप्त करने पर खगेश कुमार अरसे को स्वर्गीय दुर्गा सिंह तोमर स्मृति स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इन विद्यार्थियों को भी मिले स्मृति स्वर्ण पदक

गायन में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले आयुष मिश्र और अक्षत मिश्रा को पं. राजा भैया पूछवाले संगीत परिषद स्मृति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। समस्त संकायों में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले पुनीत कदवाने को स्व. पं. पीएल गोहदकर स्मृति स्वर्ण पदक मिला। नाट्य एवं रंगमंच में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अमिताभ आचार्य और विकास सिंह गोयल को स्व. श्रीमती शारदा महेंद्र सिंह स्मृति स्वर्ण पदक तथा रजत सिंह और ऐश्वर्य दुबे को लाल रामशरण आनंद स्मृति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। समारोह में वर्ष 2024-25 के स्नातक स्तर की 115 और स्नातकोत्तर स्तर की 66 तथा वर्ष 2025-26 के स्नातक स्तर की 113 और स्नातकोत्तर स्तर की 74 उपाधियां दी गईं। शोध उपाधियों में गायन की पांच, तबला की दो और चित्रकला की सात उपाधियां शामिल हैं। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव डॉ. आशुतोष खरे ने आभार व्यक्त किया। समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, पूर्व कुलगुरु, शिक्षक, संगतकार, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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