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E-20 petrol पूरी तरह सुरक्षित : पेट्रोलियम मंत्रालय

E-20 petrol पूरी तरह सुरक्षित : पेट्रोलियम मंत्रालय

नई दिल्ली। ई20 पेट्रोल को लेकर भ्रामक सूचनाओं के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है और इस पर कई वैज्ञानिक शोध किए गए हैं, जिसका विदेशों में भी वर्षों से सफलतापूर्वक उपयोग हो रहा है। केंद्र सरकार ने ई20 पेट्रोल के संबंध में सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही भ्रामक सूचनाओं को पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया है। सरकार ने उन दावों को महज़ अफवाह बताया, जिनमें पानी की बर्बादी, इंजन खराब होने या बीमा समाप्त होने की बात कही जा रही थी। इथेनॉल उत्पादन में पानी की बर्बादी के दावे को गलत बताते हुए मंत्रालय ने कहा कि एक लीटर इथेनॉल बनाने में केवल 3 से 5 लीटर पानी लगता है, और नई फैक्ट्रियां इसे रीसायकल भी करती हैं। इथेनॉल मुख्य रूप से देश की ज़रूरत से बचे अतिरिक्त चावल और अब 40 प्रतिशत से अधिक मक्के से बनता है, जिसकी खेती में कम पानी लगता है। इंजन खराब होने के डर पर, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया के टेस्ट का हवाला दिया गया, जिसमें कारों को 40,000 किलोमीटर और बाइकों को 20,000 किलोमीटर चलाकर देखा गया। परीक्षणों में पाया गया कि गाड़ी के चलने या माइलेज पर कोई खास नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि इथेनॉल की बेहतर गुणवत्ता के कारण इंजन बेहतर काम करता है। 


सरकार ने इस कार्यक्रम के फायदों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया है, जिससे देश के 1.9 लाख करोड़ रुपये बचे हैं, किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान मिला है और लगभग 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है, जो एक बड़ी कामयाबी है। हालांकि, बहुत पुरानी गाड़ियों में कुछ रबर के पुर्जे समय से पहले बदलने पड़ सकते हैं। सोशल मीडिया पर चल रहे चीनी या कीड़े से संबंधित दावों को भी सरकार ने निराधार बताया। इथेनॉल को रिफाइन करते समय उसमें से चीनी पूरी तरह से निकाल दी जाती है, और इसमें ऐसे रसायन मिलाए जाते हैं जो कीड़ों को दूर रखते हैं। सरकार ने गन्ने का रस मिलाते हुए दिखाए गए वीडियो को भी पूरी तरह नकली बताया है।

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