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डिजिटल तिजोरी पर एआई सेंध का डर, Finance Minister ने बैंकों को किया अलर्ट

डिजिटल तिजोरी पर एआई सेंध का डर, Finance Minister ने बैंकों को किया अलर्ट

बैंकों को तत्काल अपने सुरक्षा तंत्र मजबूत करने और आपस में सूचना साझा करने का निर्देश दिया

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय बैंकों को एक नए, बेहद शक्तिशाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मॉडल क्लॉड माइथोस से उत्पन्न होने वाले गंभीर साइबर खतरों के प्रति आगाह किया है। यह एआई इतनी क्षमता रखता है कि वह बैंक प्रणालियों में छिपी हुई उन कमजोरियों को भी पहचान सकता है, जिन्हें मानवीय आंखें नहीं देख पातीं, जिससे हैकर्स के लिए मास्टर चाबी बनने का खतरा पैदा हो गया है। सरकार ने इस संभावित खतरे को देखते हुए बैंकों को तत्काल अपने सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाने का निर्देश दिया है, ताकि आम जनता के पैसे और डेटा को सुरक्षित रखा जा सके। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ बैंकों के शीर्ष अधिकारियों की एक उच्च-स्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य एंथ्रोपिक द्वारा विकसित क्लॉड माइथोस नामक इस अत्यधिक उन्नत एआई मॉडल से उत्पन्न होने वाले साइबर खतरों को समझना था। यह एआई अपनी अनूठी क्षमताओं के लिए जाना जाता है, जो ऑपरेटिंग सिस्टम और इंटरनेट ब्राउज़रों में उन गुप्त कमजोरियों को भी उजागर कर सकता है जो दशकों से अनछुई थीं। क्लॉड माइथोस को अभी तक आम जनता के लिए जारी नहीं किया गया है और इसका एक्सेस केवल अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी 40 चुनिंदा कंपनियों तक सीमित है। हालांकि, कुछ अनधिकृत लोगों द्वारा इसके एक्सेस की रिपोर्टों ने वैश्विक स्तर पर, खासकर बैंकिंग क्षेत्र में, चिंता बढ़ा दी है। सिर्फ भारत ही नहीं, अमेरिका की सरकार भी वॉल स्ट्रीट के बैंकों के साथ इस खतरे पर चर्चा कर रही है।

वित्त मंत्रालय ने सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को पहले से कहीं अधिक सतर्क रहने, अपनी तैयारी पुख्ता करने और आपस में मिलकर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया है। सीतारमण ने बैंकों को अपने आईटी प्रणालियों को तत्काल मजबूत करने और ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया। सरकार एआई जनित हमलों को पहचानने और रोकने के लिए एक विशेष ढांचा तैयार करने की योजना बना रही है। इस पहल के तहत, इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर एक रियल-टाइम सूचना साझाकरण प्रणाली विकसित की जाएगी। इसका अर्थ है कि जैसे ही किसी एक बैंक पर कोई खतरा दिखेगा, उसकी जानकारी तुरंत पूरे देश के बैंकिंग सिस्टम को मिल जाएगी। इसके अतिरिक्त, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन को भी साइबर हमलों के त्वरित जवाब के लिए एक संस्थागत व्यवस्था बनाने की सलाह दी गई है। वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक अब इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि क्लॉड माइथोस से भारत के वित्तीय क्षेत्र को कितना बड़ा खतरा हो सकता है, ताकि समय रहते बचाव के उपाय किए जा सकें और आम आदमी की मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे।

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