भारत के दुश्मनों की China में जमकर हो रही खातिरदारी
भारत के लिए रणनीतिक चुनौती
बीजिंग। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इन दिनों बीजिंग में पाकिस्तानी नेताओं की विशेष खातिरदारी में जुटे हैं। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर बीजिंग पहुंचे। हालांकि, इस दौरे का आधिकारिक उद्देश्य पश्चिम एशिया (ईरान-अमेरिका तनाव) में शांति स्थापित करने के रास्ते तलाशना बताया गया है, लेकिन धरातल पर दोनों देश अपना पुराना भाईचारा और कूटनीतिक गठजोड़ दिखाने में व्यस्त हैं। ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में हुई बैठक के दौरान राष्ट्रपति जिनपिंग ने शहबाज शरीफ को अपना पुराना मित्र और पाकिस्तान को एक अटूट दोस्त बताया। जिनपिंग ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की कोशिशों के लिए पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की भी खुलकर तारीफ की। दूसरी तरफ, शहबाज शरीफ ने भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर चीनी प्रस्तावों की सराहना की और चीनी प्रधानमंत्री ली क्विंग से मुलाकात कर शांति बहाली के प्रयासों में चीन का सहयोग मांगा। दरअसल, पाकिस्तान इस क्षेत्र में मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कोई बड़ी कामयाबी न मिलने के बाद उसने चीन का रुख किया है। चीन और पाकिस्तान का यह खुला प्रदर्शन भारत की रणनीतिक और सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाने वाला है।
हाल ही में चीन ने पहली बार यह स्वीकार किया था कि वह एक सैन्य अभियान के दौरान भारत के खिलाफ पाकिस्तान की मदद कर रहा था। ऐसे समय में जब ईरान-अमेरिका तनाव के कारण वैश्विक संतुलन डगमगा रहा है, चीन और पाकिस्तान की यह जुगलबंदी भारत के लिए दोहरे मोर्चे की चुनौती को और गंभीर बना सकती है। चीन, पाकिस्तान के जरिए इस पूरे क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक और सैन्य पकड़ को मजबूत करना चाहता है। इस बैठक के दौरान शहबाज शरीफ ने विवादित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के अगले चरण के काम में तेजी लाने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत शुरू से ही सीपीईसी का कड़ा विरोध करता रहा है, क्योंकि इस परियोजना का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है। भारत ने हमेशा स्पष्ट रुख अपनाया है कि पीओके भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहां किसी भी देश द्वारा किया जाने वाला कोई भी निर्माण कार्य पूरी तरह अवैध है। इसके बावजूद, चीन इस परियोजना के माध्यम से वैश्विक कनेक्टिविटी पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश में है, जो भारतीय संप्रभुता के लिहाज से एक बड़ा खतरा है।
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