Iran ने कहा- धमकियों के बजाय सम्मान और संवाद का रास्ता ही वैश्विक शांति के लिए बेहतर
तेहरान। मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य संघर्ष अब एक ऐसे खतरनाक मुकाम पर पहुंच गया है, जहां मिसाइलों के साथ-साथ तेल, पानी और पैसा भी युद्ध के बड़े हथियारों के रूप में उभर रहे हैं। ईरान ने अमेरिका को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उसके पावर प्लांट या अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला किया गया, तो वह दुनिया की सबसे अहम तेल लाइफलाइन हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर देगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उन्होंने अमेरिका को सुझाव दिया कि धमकियों के बजाय सम्मान और संवाद का रास्ता अपनाना ही वैश्विक शांति के लिए बेहतर होगा। दूसरी ओर, अमेरिका भी इस मोर्चे पर पीछे हटते नहीं दिख रहा है। वर्तमान में यह मार्ग तकनीकी रूप से खुला है, लेकिन युद्ध की आशंकाओं के कारण यहां से गुजरने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा पहले ही प्रभावित हो चुका है। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी पहुंच केवल तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि वह क्षेत्र के ऊर्जा केंद्रों और समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाले डिसैलिनेशन प्लांट्स को भी निशाना बना सकता है, जिससे आम जनता के जीवन पर सीधा संकट खड़ा हो जाएगा।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जलमार्ग फिलहाल पूरी तरह अवरुद्ध नहीं है, लेकिन बीमा कंपनियों द्वारा युद्ध के डर से जहाजों को कवर देने से मना करने के कारण व्यापारिक आवाजाही थम गई है। उन्होंने अमेरिका को सुझाव दिया कि धमकियों के बजाय सम्मान और संवाद का रास्ता अपनाना ही वैश्विक शांति के लिए बेहतर होगा। दूसरी ओर, अमेरिका भी इस मोर्चे पर पीछे हटते नहीं दिख रहा है।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने घोषणा की है कि अमेरिका के पास वर्तमान में युद्ध संचालन के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, लेकिन भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए वे अमेरिकी कांग्रेस से 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त रक्षा फंड की मांग कर सकते हैं। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस भारी-भरकम बजट प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे भविष्य की सैन्य तैयारियों के लिए अनिवार्य बताया है। हालांकि, अमेरिका के भीतर ही इस वित्तीय बोझ को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। कई अमेरिकी सांसदों ने तर्क दिया है कि देश का रक्षा बजट पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर है और एक नई महंगी जंग का बोझ उठाना अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम भरा हो सकता है। आंकड़ों के अनुसार, इस संघर्ष के शुरुआती छह दिनों में ही अमेरिका को लगभग 11 अरब डॉलर खर्च करने पड़े हैं। विशेषज्ञों को डर है कि यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो यह इराक और अफगानिस्तान जैसे दशकों पुराने और खर्चीले युद्धों की याद दिला सकता है। इसी बीच, युद्ध की तपिश वेस्ट बैंक तक पहुंच गई है, जहां इजरायली बस्तियों और फिलिस्तीनियों के बीच हिंसक झड़पें तेज हो गई हैं। इस हिंसा में जान-माल का काफी नुकसान हुआ है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है।
Comment / Reply From
You May Also Like
Popular Posts
Newsletter
Subscribe to our mailing list to get the new updates!