कभी भी फट सकते हैं ईरानी तेल के कुएं: America
तेहरान के तेल कुओं पर ट्रंप क्यों कर रहे यह अजीब दावा
तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब धमकियों और दावों के एक नए दौर में पहुंच गया है। दोनों ही देश एक तरफ शांति की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपनी जीत की कहानियाँ गढ़ने में लगे हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा दावा किया है जिसने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। ट्रंप का मानना है कि ईरान के तेल के कुएं जल्द ही किसी गुब्बारे की तरह फट सकते हैं। यह बयान सुनने में जितना डरावना है, तकनीक रूप से उतने ही सवाल खड़े करता है कि क्या वाकई बिना किसी सैन्य हमले के, केवल दबाव बढ़ने से तेल के कुओं में विस्फोट संभव है? एक हालिया इंटरव्यू में ट्रंप ने तर्क दिया कि यदि ईरान के तेल निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी जाए और उसके स्टोरेज टैंक भर जाएं, तो कुओं से निकलने वाले तेल का दबाव इतना बढ़ जाएगा कि वे खुद-ब-खुद फटने लगेंगे। ट्रंप का मानना है कि तेल अपनी प्राकृतिक रफ्तार से बाहर आता है और उसे लगातार पाइपलाइनों के जरिए निकालना अनिवार्य है। यदि स्टोरेज फुल होने के कारण यह प्रक्रिया रुकी, तो दबाव धमाके का कारण बनेगा। दरअसल, ट्रंप का इशारा उन अमेरिकी प्रतिबंधों की ओर था जिनके जरिए ईरान के समुद्री व्यापारिक रास्तों को ब्लॉक करने की योजना है। अमेरिका चाहता है कि ईरान तेल न बेच पाए, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा जाए और वह परमाणु समझौते के लिए मजबूर हो। हालांकि, भू-वैज्ञानिकों और तेल विशेषज्ञों ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल के कुएं कोई हवा से भरे गुब्बारे नहीं हैं। यदि तेल का भंडारण पूरा हो जाता है, तो कुओं के वाल्व को तकनीकी रूप से बंद किया जा सकता है।
कुओं को बंद करने से भविष्य में उन्हें पुनः शुरू करने में अधिक खर्च आ सकता है या तेल निकालने की गति प्रभावित हो सकती है, लेकिन प्राकृतिक दबाव से धमाका होना मुमकिन नहीं है। 2019-20 के प्रतिबंधों के दौरान भी ईरान ने अपना उत्पादन घटाया था, लेकिन तब कोई विस्फोट नहीं हुआ था।वर्तमान में ईरान रोजाना करीब 32 लाख बैरल तेल निकालता है। उसके पास करीब 8.6 करोड़ बैरल भंडारण की क्षमता है और समुद्र में खड़े जहाजों में भी काफी तेल रखा जा सकता है। गणना के अनुसार, यदि निर्यात पूरी तरह बंद हो जाए, तो ईरान के पास केवल 3 से 4 सप्ताह का समय बचेगा। इसके बाद उसे उत्पादन रोकना होगा, लेकिन कुएं फटने जैसा कोई खतरा वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं होता है। फिलहाल ईरान शैडो फ्लीट के जरिए चोरी-छिपे व्यापार कर रहा है, जो अमेरिका के लिए असली चुनौती बना हुआ है।
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