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  • Sunday, 18 October 2026
एआई का ऐसा इस्तेमाल परेशान करने वाला है: Shriya Saran

एआई का ऐसा इस्तेमाल परेशान करने वाला है: Shriya Saran

मुंबई। आर्टिपफिशियल इंटेलिजेंस यानि एआई के गलत इस्तेमाल को लेकर अभिनेत्री श्रेया सरन ने भी चिंता जताई है। एक्ट्रेस ने कहा कि एआई तकनीक का दुरुपयोग लोगों के लिए गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है। श्रेया सरन के मुताबिक, एआई के जरिए तस्वीरों में इस तरह बदलाव किए जाते हैं कि वास्तविक व्यक्ति की छवि ही बदल जाती है। कई बार कपड़ों और शरीर के आकार तक में आपत्तिजनक बदलाव कर दिए जाते हैं। एक साक्षात्कार में श्रेया सरन ने बताया कि उन्होंने अपनी तस्वीरों के साथ भी इस तरह की छेड़छाड़ देखी है। अभिनेत्री के अनुसार, कुछ तस्वीरों में शरीर के अंगों का आकार बदल दिया जाता है, जबकि कुछ में कपड़ों को हटाकर अश्लील रूप देने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि कई बार तस्वीर इतनी बदल दी जाती है कि उन्हें खुद भी समझने में कठिनाई होती है कि उसमें दिखाई देने वाली महिला वास्तव में वही हैं या नहीं।


श्रेया ने स्वीकार किया कि ऐसी सामग्री सामने आने पर कई बार उसे नजरअंदाज करना पड़ता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य है। उन्होंने इसे परेशान करने वाला बताया और कहा कि एआई का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। उनके अनुसार, तकनीक के अनेक सकारात्मक पहलू हैं और इसका उपयोग लोगों की मदद करने तथा रचनात्मक कामों को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, गलत इस्तेमाल से नुकसान भी हो सकता है। यह मुद्दा अभिनेत्री जाह्नवी कपूर के गाने ‘चुट्टमल्ले’ के एआई से बदले गए वीडियो को लेकर हुए विवाद के बाद फिर चर्चा में आया। यह गीत फिल्म ‘देवरा: पार्ट 1’ का है, जिसमें जाह्नवी कपूर के साथ जूनियर एनटीआर दिखाई दिए थे।


रिपोर्टों के अनुसार, वायरल किए गए बदले हुए वीडियो में अभिनेत्री की छवि को आपत्तिजनक तरीके से प्रस्तुत किया गया था। जाह्नवी ने 4 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर इस घटना की निंदा की थी। जूनियर एनटीआर, चिरंजीवी, विजय देवरकोंडा और खुशबू सुंदर समेत कई कलाकारों ने भी उनका समर्थन किया था। श्रेया सरन ने फिल्म उद्योग में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर भी खुशी जताई। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल अभिनय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कहानी लेखन, निर्माण और रचनात्मक फैसलों में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। उनके मुताबिक, महिलाओं की समस्याओं को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने के लिए उन्हें फिल्म निर्माण के हर स्तर पर अवसर देना जरूरी है।

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