बीते एक साल में ATM से पैसा निकालने में आया बड़ा बदलाव
राज्यों और शहरों में एटीएम निकासी में भारी अंतर देखा गया
नई दिल्ली। देश के एटीएम अब पहले जैसी भीड़ नहीं देखते। एक रिपोर्ट के अनुसार 2025 में एटीएम से औसत मासिक नकद निकासी घटकर 1.21 करोड़ रुपए प्रति मशीन हो गई, जबकि 2024 में यह 1.30 करोड़ रुपए थी। हालांकि, एक बार में निकाली जाने वाली रकम बढ़कर 5,835 रुपए हो गई, जो यह दर्शाता है कि लोग अब बार-बार नकद निकालने के बजाय बड़ी रकम एक साथ निकाल रहे हैं। रोजमर्रा की खरीदारी जैसे किराना, बस टिकट, मोबाइल रिचार्ज और छोटे बिलों में नकद की जगह डिजिटल भुगतान, यूपीआई और कार्ड ने ले ली है। रिपोर्ट के अनुसार डिजिटल भुगतान आंकड़े हर महीने नए रिकॉर्ड बना रहे हैं, लेकिन नकद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बड़ी निकासी यह संकेत देती है कि लोग आपातकाल, स्थानीय सेवाओं और उन जगहों के लिए नकद रखना जारी रख रहे हैं जहां डिजिटल भुगतान स्वीकार नहीं किया जाता। राज्यों के बीच नकद निकासी में बड़ा अंतर देखा गया। कर्नाटक में प्रति एटीएम औसत 1.73 करोड़ निकाला गया, जबकि जम्मू-कश्मीर में यह मात्र 83 लाख रहा। महानगरों की चमक के बावजूद नकद की वास्तविक जरूरत सेमी अर्बन और ग्रामीण इलाकों में अधिक रही, जहां प्रति एटीएम औसत 1.30 करोड़ रुपए निकासी हुई। सीज़न और मौसम भी नकद निकासी पर असर डालते हैं। मानसून, गर्मी, प्रदूषण और त्योहारों के समय लोग अधिक नकद निकालते हैं। सीएमएस के खर्च से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि घरों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। 2025 में बीमा खर्च कुल खर्च का 25 प्रतिशत बन गया, जबकि शिक्षा, होटल और मनोरंजन खर्चों में गिरावट दर्ज की गई। नकद अब आदत नहीं, बल्कि भरोसे का सहारा बनकर रह गया है।
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