13 देशों के 101 संगठन गुप्त तरीके से भड़का रहे हिंसा की आग, India से फ्रांस तक हिंसक प्रदर्शनों के पीछे की कहानी
पेरिस। दुनिया भर में भड़कने वाले हिंसक विरोध-प्रदर्शनों और जनांदोलनों के पीछे एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का सनसनीखेज पर्दाफाश हुआ है। एक विस्तृत खोजी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि 13 देशों के 101 संगठन मिलकर एक ग्लोबल प्रोटेस्ट इकोसिस्टम चला रहे हैं। इस खुलासे के मुताबिक फ्रांस की सड़कों पर मचे बवाल से लेकर भारत और अन्य मुल्कों में युवाओं के नेतृत्व में होने वाले बड़े आंदोलनों के तार आपस में सीधे जुड़े हुए हैं।
यह नेटवर्क स्थानीय मुद्दों और जनआक्रोश को हवा देकर सीमाओं के पार अराजकता फैलाने और उसका दायरा बढ़ाने का काम कर रहा है। यह पड़ताल उस अदृश्य तंत्र की परतें खोलती है, जो पर्दे के पीछे से वैश्विक अशांति की स्क्रिप्ट तैयार करता है। इस सिंडिकेट में वामपंथी और समाजवादी संगठन, ट्रेड यूनियनें, छात्र गुट, एडवोकेसी नेटवर्क और कुछ मीडिया संस्थान सक्रिय रूप से शामिल हैं। यह नेटवर्क अलग-अलग देशों के स्थानीय असंतोष को एक मंच पर लाकर उसे अंतरराष्ट्रीय रंग देने की रणनीति अपनाता है। रिपोर्ट के अनुसार, एक देश में शुरू होने वाले विरोध-प्रदर्शन के संदेशों, नारों और एजेंडे को दूसरे देशों में तेजी से वायरल और संगठित करने में ये संगठन अहम भूमिका निभाते हैं।
नैरेटिव और टाइमिंग बिल्कुल एक जैसी
जांच में यह भी रेखांकित किया गया है कि अलग-अलग देशों की समस्याएं भले ही भिन्न हों, लेकिन उनके विरोध का तरीका, नैरेटिव और टाइमिंग बिल्कुल एक जैसी नजर आती है। यह पूरा ढांचा किसी सीमा में बंधा नहीं है, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की तरह काम करता है जो दुनिया भर में सरकारों के खिलाफ असंतोष भड़काने और विरोध को खाद-पानी देने के लिए तालमेल बिठाता है। एक पुरानी जांच में फ्रांस के छात्र विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े 50 संगठनों की पहचान की गई थी, जो अब बढ़कर 101 तक पहुंच गई है।
इन संगठनों की भूमिका पर सवाल
इस जांच में ‘इंडियन अलायंस पेरिस’ का भी ज़िक्र है, जो फ्रांस में स्थित छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों का एक संगठन है और फ्रांस व भारत के विरोध-प्रदर्शनों के संदेशों को आपस में जोड़ता है। ‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ नामक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संगठन ने भी 16 अक्टूबर की एक ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को एक मंच पर लाने का काम किया। रिपोर्ट में नेविल रॉय सिंघम से जुड़े संगठनों जैसे ‘ब्रेकथ्रू न्यूज़’, ‘कोडपिंक’ और ‘पार्टी फॉर सोशलिज्म एंड लिबरेशन’ की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है, जो रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया के जरिए विरोध प्रदर्शनों को व्यापक बनाते हैं। ‘ट्राइकॉन्टिनेंटल’ रिसर्च इंस्टीट्यूट के नेतृत्वकर्ता विजय प्रशांत ने भी ‘एक्स’ पर पेरिस, नई दिल्ली और ब्यूनस आयर्स में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच समानताएं बताईं।
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