30 रन के ओवर ने Ishant Sharma को तोड़ा, किया मुश्किल दौर का खुलासा, मंगेतर प्रतिमा सिंह ने डिप्रेशन से निकालकर बचाया करियर
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा ने हाल ही में अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर का खुलासा किया है, जिसमें एक समय वह क्रिकेट से नफरत करने लगे थे और गहरे डिप्रेशन में चले गए थे। यह वाकया साल 2013 का है, जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक रोमांचक वनडे मैच में उनके एक ओवर ने भारत को जीत के करीब आकर हार का सामना करने पर मजबूर कर दिया था। मैच अपने अंतिम पड़ाव पर था और ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए आखिरी तीन ओवरों में 44 रनों की दरकार थी। कप्तान ने भरोसा जताते हुए गेंद ईशांत शर्मा के हाथों में सौंपी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज जेम्स फॉकनर ने ईशांत के उस ओवर में आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 30 रन बटोर लिए, जिससे भारतीय टीम ने आसानी से जीतता हुआ मैच गंवा दिया। इस हार का सारा बोझ ईशांत के कंधों पर आ गिरा।
मैच खत्म होने के बाद ईशांत पूरी तरह टूट चुके थे। उन्हें लगा कि उनकी एक गलती ने पूरे देश की उम्मीदों और टीम इंडिया की मेहनत पर पानी फेर दिया है। इस घटना के बाद वह गहरे डिप्रेशन की चपेट में आ गए और लगातार 15 दिनों तक खुद को कमरे में बंद कर रोते रहे। क्रिकेट के प्रति उनका प्यार ही उनके लिए सबसे बड़े मानसिक तनाव का कारण बन गया था। जब ईशांत निराशा के सबसे गहरे अंधेरे में डूब रहे थे, तब उनके जीवन में उम्मीद की किरण बनकर आईं उनकी तत्कालीन मंगेतर और अब पत्नी प्रतिमा सिंह। एक एथलीट होने के नाते, प्रतिमा खेल के दबाव को बखूबी समझती थीं। उन्होंने ईशांत को अकेले रोने के बजाय सच्चाई का सामना करने का साहस दिया। प्रतिमा ने उनसे साफ शब्दों में कहा, क्रिकेट को सिर पर मत चढ़ाओ, जिंदगी बहुत बड़ी है। आज तुम्हारे पास दो रास्ते हैं या तो घर पर बैठकर उस एक ओवर पर रोते रहो, या फिर मैदान में वापस निकलकर इतनी कड़ी मेहनत करो कि यह हार भी तुम्हारे सामने छोटी पड़ जाए।
प्रतिमा की इस कड़वी लेकिन सच्ची सलाह ने ईशांत के सोए हुए स्वाभिमान को जगा दिया। उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा, अपनी गेंदबाजी पर कड़ी मेहनत की और मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाया। इस मेहनत का फल मिला और ईशांत शर्मा ने मैदान पर नई ऊर्जा के साथ वापसी की। जो गेंदबाज कभी 30 रन देने के बाद डिप्रेशन में चला गया था, उसी ईशांत ने अपनी धारदार गेंदबाजी से दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाजों को खौफ में डाला और भारत के लिए 100 से अधिक टेस्ट मैच खेलने वाले चुनिंदा तेज गेंदबाजों की सूची में अपना नाम दर्ज कराया।
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