Hormuz में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान को दिया वीजा
वॉशिंगटन। अमेरिका ने एक तरफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अरागची को अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में शामिल होने के लिए वीजा मंजूर कर दिया है, तो वहीं दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की कार्रवाई से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने टोगो के झंडे वाले एक तेल टैंकर को निशाना बनाया और उसे हिरासत में लेने का दावा किया है। यह घटना दर्शाती है कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीति का दरवाजा खुला भी है और समुद्र में टकराव भी जारी है।
अमेरिकी रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, विदेश मंत्री अब्बास अरागची और तेहरान के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्चस्तरीय बैठकों में शामिल होने की मंजूरी दी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र के मेजबान देश के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों के तहत ईरान के मुख्य प्रतिनिधिमंडल को महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, इस प्रतिनिधिमंडल पर अमेरिका में यात्रा से जुड़े प्रतिबंध और महंगी या लग्जरी चीजों की खरीद पर सीमाएं लागू रहेंगी, और इस बार ईरानी प्रतिनिधिमंडल पिछले साल के मुकाबले छोटा होगा। अमेरिका ने यह भी बताया कि वीजा प्रक्रिया में राष्ट्रीय और सार्वजनिक सुरक्षा के मानकों को भी ध्यान में रखा गया है।
इसी बीच, न्यूयॉर्क में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने का रास्ता साफ होने के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य से तनाव बढ़ाने वाली खबर आई। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उसने टोगो के झंडे वाले तेल टैंकर ट्रेंड को निशाना बनाया और उसे हिरासत में ले लिया। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, जहाज पर आग लगने के बाद उसे रोका गया। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने आरोप लगाया कि टैंकर ने होर्मुज से गुजरने के लिए ईरान के बताए रास्ते का पालन नहीं किया और गैरकानूनी रास्ते से निकलने की कोशिश की। ब्रिटेन के मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने भी ओमान के खासाब से लगभग 29.6 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में होर्मुज जलडमरूमध्य में एक सुरक्षा घटना की जानकारी दी, हालांकि उन्होंने जहाज का नाम नहीं बताया। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, और यहां किसी जहाज को रोकना या उसके रास्ते को लेकर विवाद वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर गहरा असर डाल सकता है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच लगातार बढ़ते संघर्ष के बाद से इस क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।
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