History से वर्तमान तक: पवित्र शहर मक्का पर कब-कब आए संकट!
मक्का। सऊदी अरब ने दावा किया है कि यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा मक्का की ओर भेजे गए एक खतरनाक ड्रोन को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया गया। इस घटना के बाद मक्का में पहली बार आपातकालीन एयर रेड अलर्ट जारी करना पड़ा। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने इस कोशिश की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि दो पवित्र मस्जिदों और वहां आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों की सुरक्षा एक रेड लाइन है, जिसे पार करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी।
हालांकि, हूती विद्रोहियों ने मक्का को निशाना बनाने के सऊदी दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे गलत जानकारी बताया है और कहा है कि वे पवित्र स्थलों को कभी निशाना नहीं बनाते। अतीत में भी मक्का पर कई बार बाहरी या आंतरिक शक्तियों द्वारा हमले किए गए हैं, या उस पर संकट मंडराया है।
हालिया घटना: मक्का में पहली बार एयर रेड अलर्ट
ताजा तनाव के दौरान, सऊदी सिविल डिफेंस ने मक्का शहर में आपातकालीन हवाई सुरक्षा चेतावनी जारी की। सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने घोषणा की कि प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने से ठीक पहले एक हूती ड्रोन को मार गिराया गया। यह ड्रोन संभवतः मक्का के पवित्र क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था। हालांकि कुछ देर बाद खतरे को टलता देख अलर्ट हटा लिया गया, लेकिन इतिहास में यह पहला मौका नहीं था जब मक्का शहर में इस तरह का रेड अलर्ट जारी हुआ, जिसने दुनिया भर के मुसलमानों को चिंता में डाल दिया।
जुलाई 2017: हूती विद्रोहियों का पहला मिसाइल हमला!
इससे पहले जुलाई 2017 में भी यमन की तरफ से हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के भीतर मक्का को निशाना बनाकर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी। सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने मक्का से करीब 69 किलोमीटर दूर अल-वासिया क्षेत्र में इस मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया था। हालांकि, हूतियों ने उस समय भी दावा किया था कि उनका निशाना सऊदी अरब का एक सैन्य अड्डा था, न कि मक्का। लेकिन इस घटना ने भी पवित्र शहर की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
नवंबर-दिसंबर 1979: हरम शरीफ (ग्रैंड मस्जिद) पर खूनी कब्जा
बाहरी ताकतों से इतर, आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा आंतरिक सुरक्षा संकट 1979 में तब आया जब जुहैमान अल-उतैबी के नेतृत्व में 200 से अधिक सशस्त्र चरमपंथियों ने मक्का की मुख्य मस्जिद अल-हरम (ग्रैंड मस्जिद) पर कब्जा कर लिया और हजारों श्रद्धालुओं को बंधक बना लिया। इन विद्रोहियों ने अपने एक साथी को महदी (इस्लामिक मुक्तिदाता) घोषित कर दिया था। इस संकट से निपटने के लिए उलेमाओं से विशेष अनुमति मिलने के बाद सऊदी सुरक्षा बलों ने दो सप्ताह तक मस्जिद परिसर के भीतर भीषण युद्ध लड़ा।
683 ईस्वी: उमय्यद सेना द्वारा मक्का की पहली बड़ी घेराबंदी
इस्लाम के शुरुआती दौर में खिलाफत की सत्ता के लिए छिड़े दूसरे गृहयुद्ध के दौरान, उमय्यद सेना ने मक्का को घेर लिया था। यह घेराबंदी तब हुई जब मक्का में अब्दुल्ला इब्न अल-जुबैर ने उमय्यद खिलाफत के खिलाफ दावा पेश किया था। शहर पर कब्जे के इस अभियान में कैटापुलट (पत्थर फेंकने वाले युद्धक यंत्रों) से भारी हमले किए गए, जिसके प्रभाव से पवित्र काबा में भीषण आग लग गई और उसकी संरचना को भारी नुकसान पहुंचा था। यह घटना इस्लामिक इतिहास में काबा को पहुंचाए गए शुरुआती बड़े नुकसानों में से एक थी।
692 ईस्वी: अल-हज्जाज इब्न युसूफ ने की घेराबंदी
इसके कुछ साल बाद 692 ईस्वी में उमय्यद शासक अब्द अल-मलक के क्रूर सेनापति अल-हज्जाज इब्न युसूफ ने मक्का की फिर से महीनों तक घेराबंदी की। इस घेराबंदी का उद्देश्य अब्दुल्ला इब्न अल-जुबैर के विद्रोह को कुचलना था। इस दौरान हुई भारी गोलाबारी और भीषण युद्ध में विरोधी नेता अब्दुल्ला इब्न अल-जुबैर परास्त हुए और मारे गए, जिसके बाद मक्का पर उमय्यद खिलाफत का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हुआ। इस घेराबंदी ने भी शहर और पवित्र स्थलों को काफी नुकसान पहुंचाया था।
930 ईस्वी: कर्मतियन आक्रमण
मक्का के इतिहास के सबसे क्रूर और विनाशकारी हमलों में 930 ईस्वी का कर्मतियन आक्रमण गिना जाता है। बहरीन के इस उग्रवादी शिया संप्रदाय के नेता अबू ताहिर अल-जनाबी ने हज सीजन के दौरान मक्का पर हमला कर हजारों तीर्थयात्रियों का बेरहमी से नरसंहार किया था। हमलावरों ने पवित्र जमजम कुएं में शव फेंके और सबसे पवित्र माने जाने वाले हजर-ए-अस्वद (काला पत्थर) को काबा से उखाड़कर अपने साथ ले गए थे। इस पवित्र पत्थर को लगभग 20 साल बाद भारी फिरौती के बाद वापस लाया गया था। यह घटना इस्लामिक इतिहास में पवित्र स्थलों के प्रति सबसे बड़े अनादर और बर्बरता के रूप में दर्ज है।
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