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  • Tuesday, 03 February 2026
समझौते से American farmers को बेहतर दाम मिलेंगे, ज्यादा पैसा आएगा

समझौते से American farmers को बेहतर दाम मिलेंगे, ज्यादा पैसा आएगा

भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर अमेरिकी कृषि सचिव का दावा

वाशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है। अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुक रोलिंस ने दावा किया है कि इस समझौते के बाद अमेरिका भारत के बाजार में बड़े पैमाने पर अपने कृषि उत्पाद भेज सकेगा। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और ग्रामीण अमेरिका में ज्यादा पैसा पहुंचेगा। हालांकि भारत सरकार की ओर से इस समझौते की पूरी शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन अमेरिकी बयान के बाद भारत में राजनीतिक और किसान संगठनों की चिंता बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट में रोलिंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अमेरिकी किसानों के लिए नतीजे दिए हैं। उनके मुताबिक नया भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारत के विशाल बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ाएगा, जिससे कीमतें बेहतर होंगी और ग्रामीण अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। यह ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति की बड़ी सफलता है। 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा करीब 1.3 बिलियन डॉलर था। भारत की बड़ी और बढ़ती आबादी को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अहम बाजार बताते हुए उन्होंने दावा किया कि यह समझौता उस घाटे को कम करने में मदद करेगा। अमेरिकी कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में भारत को अमेरिकी कृषि निर्यात करीब 1.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, जिसमें बादाम, पिस्ता, कपास और सोयाबीन तेल की बड़ी हिस्सेदारी रही।

बता दें यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब कुछ महीने पहले ही ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया था। अब ट्रंप का दावा है कि इस सौदे के तहत भारत अमेरिका के खिलाफ टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को ‘जीरो’ करने की दिशा में कदम बढ़ाएगा। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि भारत रूसी तेल की खरीद कम या बंद करेगा और बदले में अमेरिका से ऊर्जा व कृषि उत्पादों का आयात बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि भारत के लिए बेहद संवेदनशील क्षेत्र है, इसलिए यहां किसी भी तरह की रियायत राजनीतिक और सामाजिक विरोध को जन्म दे सकती है। जब तक भारत सरकार समझौते की शर्तों को स्पष्ट नहीं करती, तब तक इस मुद्दे पर बवाल मचता रहेगा।

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