मृत घोषित American woman ने 24 मिनट पश्चात साझा किया अनुभव
- जीवनदान देने वाले पति को धन्यवाद देते हुए बताया ‘हीरो’
वाशिंगटन। हृदयगति निष्क्रिय होने के पश्चात विशेषज्ञों द्वारा मृत घोषित अमरीकी महिला ने 24 मिनट पश्चात सजीवता से अपना अनुभव साझा किया। यह दुर्लभ घटना तब होती है जब कार्डियक अरेस्ट से मृत घोषित किए गए मरीज में अचानक जीवन के लक्षण दिखाई देते हैं।‘सूत्रों के मुताबिक लेखिका लॉरेन कैनाडे ने जीवनदान के लिए आवश्यक सीपीआर सुनिश्चित कराने के लिए अपने पति को धन्यवाद देते हुए कहा कि वह हमेशा उनके ‘हीरो’ रहेंगे। कैनाडे ने बताया कि “पिछले फरवरी में मुझे घर पर अचानक कार्डियक अरेस्ट हुआ। मेरे पति ने 911 पर कॉल किया और सीपीआर शुरू किया। ईएमटी को मुझे फिर से जिंदा करने में 24 मिनट लगे। आईसीयू में 9 दिनों के बाद मुझे ठीक बताया गया और एमआरआई में मेरे दिमाग को कोई नुकसान दिखाई नहीं दिया। कैनाडे ने कहा कि दिमाग में बिजली की गतिविधि को मापने वाले इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम के नतीजे में सामने आया कि फिर से जिंदा होने के तुरंत बाद उन्हें 30 मिनट से अधिक समय तक मिर्गी के दौरे का अनुभव हुआ था।
लेखिका लॉरेन कैनाडे ने कहा कि उनके दिल की धड़कन बंद होते ही उनके पति ने 4 मिनट तक सीपीआर दिया। ऑपरेटर ने उन्हें बताया कि क्या करना है। उन्होंने ऐसा कभी नहीं किया था। उन्हें डॉक्टरों ने बताया कि उनका कार्डियक अरेस्ट कोविड की जटिलताओं के कारण हुआ था। आईसीयू में भर्ती होने पर उनका कोविड परीक्षण पॉजिटिव आया था। मेडिकल नजरिये से लेखिका लॉरेन कैनाडे ने लाजर प्रभाव या ऑटोरेससिटेशन का अनुभव किया था। लेखिका लॉरेन कैनाडे ने कहा कि बेहोशी से उठने के बाद उनको पिछले हफ्ते की कोई बात याद नहीं रही। कैनाडे ने रेडिट पर चल रहे ‘आस्क मी एनीथिंग’ प्रोग्राम के दौरान यह सब खुलासा किया। महिला ने बताया कि उनको अस्पताल ले जाया गया और बेहोशी से उठने से पहले वह दो दिनों तक कोमा में रहीं।
लेखिका लॉरेन कैनाडे का मामला दिलचस्प है। क्योंकि अधिकांश लोग ऐसे हालात में बेहोशी से उठने के बाद लंबे समय तक जीवित नहीं रहते हैं। साल 1982 और 2018 के बीच दर्ज किए गए 65 मामलों में से केवल 18 लोग ही पूरी तरह ठीक हो पाए। लेखिका लॉरेन कैनाडे ने कहा कि उनके अनुभव का सबसे दिलचस्प हिस्सा ‘अत्यधिक शांति’ की अनुभूति थी। जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह भावना ‘जागने के बाद कुछ हफ्तों’ तक उनके साथ रही। उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने जीवन की घटनाओं को चमकते हुए नहीं देखा। यह एक ऐसा लक्षण जिसका वर्णन अनेक लोगों ने किया है।
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