टैरिफ और रणनीति से अब American workers और उद्योग को हो रहा फायदा
व्यापारी प्रतिनिध ग्रीर ने इस रणनीति को “संतुलित और बराबरी वाला व्यापार” बताया
वाशिंगटन। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति का जोरदार बचाव किया है। उन्होंने प्रतिनिधियों से कहा कि टैरिफ और सख्त बातचीत की रणनीति से अब अमेरिकी मजदूरों और उद्योग को वास्तविक फायदे मिलने शुरू हो गए हैं। हाउस वेज एंड मीन्स कमेटी के सामने पेश होते हुए ग्रीर ने कहा कि प्रशासन का यह तरीका पिछली नीतियों से बिल्कुल अलग है। उनके हिसाब से पिछली नीतियों ने ऑफशोरिंग को बढ़ावा दिया था और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को कमजोर किया था। उन्होंने कहा कि हम पहले से ज्यादा सामान निर्यात कर रहे हैं और हमारे मजदूर ज्यादा काम कर रहे हैं और उन्हें पहले से ज्यादा वेतन भी मिल रहा है। उन्होंने रिकॉर्ड स्तर के निर्यात और बढ़ती मजदूरी का हवाला दिया। ग्रीर ने इस रणनीति को “संतुलित और बराबरी वाला व्यापार” बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय से दूसरे देशों के सामान को अपने बाजार में आने देता रहा, लेकिन बदले में उसे वैसी ही पहुंच नहीं मिलती थी। “यह सिर्फ बराबरी की बात है।” उनका जोर था कि अगर दूसरे देश अमेरिका के बाजार का फायदा लेना चाहते हैं, तो उन्हें भी अमेरिकी उत्पादों को अपने यहां सही तरीके से प्रवेश देना होगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस नीति का एक अहम हिस्सा टैरिफ है। ग्रीर ने कहा कि टैरिफ कोई अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह एक दबाव बनाने का तरीका है। उन्होंने बताया कि कई देशों में हाल ही में जो बाजार खुले हैं, वहां सिर्फ बातचीत से नहीं, बल्कि आर्थिक दबाव डालने से संभव हुआ है। ग्रीर ने शुरुआती आर्थिक फायदों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2025 में इस नीति के लागू होने के बाद से अमेरिका का व्यापार घाटा 24 फीसदी कम हुआ है। साथ ही, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी सुधार दिख रहा है। उनके मुताबिक उत्पादन बढ़ा है, मजदूरी में बढ़ोतरी हुई है और कामगारों की मांग भी बढ़ी है।
इसके साथ ही, ग्रीर ने यह भी माना कि यह बदलाव तुरंत नहीं होगा। ग्रीर ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि टैरिफ की वजह से महंगाई बढ़ रही है, लेकिन कुछ डेमोक्रेटिक सांसदों ने बढ़ती उपभोक्ता कीमतों और आर्थिक अनिश्चितता की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि सरकार का फोकस देश के अंदर उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर है। उनका कहना था कि टैरिफ का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाला ज्यादा से ज्यादा सामान देश के अंदर ही बने, ताकि विदेशी निर्भरता कम हो। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका अपने कई व्यापार समझौतों की समीक्षा की तैयारी कर रहा है और कई देशों के साथ बातचीत जारी है। वाशिंगटन में टैरिफ और वैश्विक व्यापार को लेकर बहस तेज हो रही है। ऐसे में ग्रीर के बयान से साफ है कि सरकार अपनी इस नीति पर कायम रहने वाली है और उसे भरोसा है कि अभी की परेशानियां आगे चलकर बड़े आर्थिक फायदे में बदलेंगी।
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