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अमेरिका में Student Visa नियमों में बदलाव: हजारों छात्रों की डिग्री पर खतरा, नवाचार को भी नुकसान

अमेरिका में Student Visa नियमों में बदलाव: हजारों छात्रों की डिग्री पर खतरा, नवाचार को भी नुकसान

वाशिंगटन। अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए एफ-1 और जे-1 वीजा नियमों में किए गए नए बदलावों पर चिंता जाहिर की है। एक भारतीय प्रवासी नीति समूह, फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) ने चेतावनी दी है कि चार साल की नई सीमा हजारों छात्रों को अपनी डिग्री या शोध पूरा करने से पहले ही अमेरिका से बाहर कर सकती है, जिससे देश के नवाचार और प्रतिस्पर्धा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। एफआईआईडीएस ने अमेरिकी निर्वाचित प्रतिनिधियों और अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) से डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएचएस) के नए नियम को तत्काल लागू करने पर रोक लगाने की अपील की है।


एफआईआईडीएस के अनुसार, यह नियम 16-17 जुलाई को अंतिम रूप दिया गया और सितंबर के मध्य से लागू होने वाला है। इसके तहत दशकों पुरानी ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस नीति को समाप्त किया गया है। अब विदेशी छात्रों के लिए अमेरिका में अधिकतम चार साल तक रहने की सीमा तय की गई है, जिसमें ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) और एसटीईएम ओपीटी की अवधि भी शामिल होगी। इसके अलावा, पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाली 60 दिनों की ग्रेस पीरियड को घटाकर 30 दिन किया है, और किसी भी अवधि विस्तार के लिए यूएससीआईएस से पूर्व-अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।


एफआईआईडीएस में नीति और रणनीति के प्रमुख, खंडेराव कंद ने इन बदलावों को अमेरिका की प्रतिस्पर्धा पर खुद से किया घाव बताया। उन्होंने कहा कि चार साल की यह सीमा आधुनिक डिग्रियों के वास्तविक कामकाज से मेल नहीं खाती; बैचलर डिग्री के लिए औसत समय करीब 52 माह और पीएचडी के लिए लगभग 5.7 साल होता है। जबकि यूएससीआईएस पहले से ही 11 मिलियन से अधिक लंबित मामलों का सामना कर रहा है, जिनमें लगभग एक साल का प्रोसेसिंग टाइम लगता है। कंद ने चेतावनी दी कि इससे छात्रों को अपने कार्यक्रम या शोध के बीच में ही बाहर होना पड़ेगा, प्रयोगशालाओं को आवश्यक प्रतिभा गंवानी पड़ेगी और अमेरिका अपनी नवाचार पाइपलाइन प्रतिस्पर्धियों को सौंप देगा। कई शोध-गहन कार्यक्रम, विशेषकर डॉक्टोरल कोर्स और मेडिकल ट्रेनिंग, आमतौर पर चार साल से अधिक चलते हैं।


एफआईआईडीएस ने अमेरिकी कांग्रेस और डीएचएस से अपील की है कि इन नियमों के लागू होने में देरी की जाए, छात्रों को बचाया जाए और अमेरिकी शोध व नवाचार को सुरक्षित रखा जाए। संगठन ने एफ-1 और जे-1 वीजा धारकों के लिए ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस सुरक्षा को फिर से शुरू करने का आग्रह किया है। इसके अतिरिक्त, एफआईआईडीएस ने सुझाव दिया है कि अच्छी स्थिति में पढ़ाई कर रहे छात्रों को स्वतः एक्सटेंशन दिया जाए, चार साल की अधिकतम अवधि की गणना में ओपीटी और स्टेम ओपीटी को शामिल न किया जाए, फॉर्म आई-539 आवेदनों का तेजी से निपटारा किया जाए और पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड को बहाल किया जाए।

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