क्या इन कारणों से लगातार Congress छोड़ रहे नेता
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव प्रचार के बीच बीते 24 घंटे के अंदर कांग्रेस के 3 कद्दावर लोगों ने पार्टी छोड़ दी है। बॉक्सर विजेंदर सिंह, पूर्व सांसद संजय निरूपम और प्रवक्ता गौरव वल्लभ का पार्टी छोड़ना पार्टी के लिए बहुत बड़ा सेटबैक है। ठीक चुनाव के मौके पर इन नेताओं का पार्टी से मुंह मोड़ना पार्टी के नेतृत्व की कमजोरियों को उजागर कर रहा है। गौरव वल्लभ और संजय निरूपम दोनों ने पार्टी के उन अंतर्विरोधों की चर्चा की है जिसके चलते उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी। हालांकि दोनों ने कांग्रेस को लेकर कोई नई बात नहीं जाहिर की है। कांग्रेस से जाने वाले नेता कई सालों से वहीं बात दुहरा रहे हैं पर कोई एक्शन होता नहीं दिखता है। अब सोशल मीडिया में लोग यह भी कहने लगे हैं कि इस तरह कांग्रेस में केवल गांधी परिवार ही बचेगा। गांधी परिवार की सुप्रीम कांग्रेस पार्टी में गांधी परिवार के अलावा किसी की नहीं चलती है। अगर कोई नेता गांधी परिवार के गुड बुक में जगह बनाने में असफल हैं, तब आपकी तरक्की कांग्रेस में संभव नहीं है।
इससे भी बड़ी बात ये हैं कि अगर गांधी परिवार का विश्वास पात्र बनकर आप अध्यक्ष भी बन जाते हैं, तब भी आपकी इज्जत कौड़ी के ही मोल है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को धक्का देते विडियो इसकी ही गवाही देते हैं। बुधवार को राहुल गांधी के पर्चा दाखिले से भी जरूरी काम दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष खरगे कर रहे थे पर उस कोई तवज्जों नहीं मिली, क्योंकि गांधी परिवार का कोई भी उस आयोजन में नहीं था। 1 से लेकर 10 तक सिर्फ राहुल कांग्रेस पार्टी में राहुल गांधी चाहे कितनी बार भी फेल हो नेतृत्व उनके पास ही रहेगा। ऐसा नहीं है कि पार्टी में नेताओं की कमी है। अगर गांधी परिवार के अंदर के लोगों को ही आगे बढ़ाना हो तब भी कई लोग हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा को आगे बढ़ाने के नाम पर पार्टी को सांप सूंघ जाता है। कहा जाता है कि सबसे खतरनाक होता है सपनों का मर जाना। लगातार राहुल की असफलता को देखकर प्रियंका को सामने लाया जा सकता है। कम से कम कुछ दिन के लिए एक उम्मीद जगती। कार्यकर्ताओं और नेताओं को जब कोई उम्मीद नहीं दिखेगी, तब अपने कैरियर की मौत होते देख दूसरे पार्टियों में जाने को तैयार हो जाएंगे। यूपी में अगर रायबरेली और अमेठी से प्रियंका गांधी और वरुण गांधी को टिकट दिया गया होता, तब करीब 2 सीट कांग्रेस को मिलती ही मिलती। इतना ही नहीं आसपास की कुछ और सीटों पर पार्टी का प्रभाव दिखाता। वरुण गांधी बीजेपी में रहते हुए नरेंद्र मोदी को टार्गेट करते रहे इसी उम्मीद में कि कांग्रेस उन्हें जरूर जगह देगी। पर ऐसा संभव नहीं हुआ। जब-जब पार्टी को जरुरत राहुल गांधी गायब राहुल गांधी पर शुरू से ही आरोप रहा है कि जब पार्टी की जरूरत होती है, तब वे गायब हो जाते हैं। जब पार्टी किसी विशेष अभियान की तैयारी कर रही होती है, तब राहुल विदेश यात्रा पर होते हैं। राहुल ने पिछले दिनों भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान खूब मेहनत की। जाहिर है कि उनकी मेहनत का परिणाम भी देखने को मिला। पर राहुल गांधी की मेहनत में निरंतरता नहीं दिखाती है।
जबकि उनका मुकाबला पीएम मोदी और शाह से हैं जो कि बीजेपी के 24 गुणा 7 राजनीति करने वाले से है। विचाराधारा को लेकर पार्टी के अंदर कन्फ्यूजन कांग्रेस पार्टी में विचारधारा के नाम पर बुरी तरह कन्फ्यूज है। पार्टी छोड़ने वाले गौरव वल्लभ कहते हैं कि एक ओर हम जाति आधारित जनगणना की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर संपूर्ण हिंदू समाज के विरोधी नजर आ रहे हैं। यह कार्यशैली जनता के बीच पार्टी को एक खास धर्म विशेष के ही हिमायती होने का भ्रामक संदेश दे रही है। इसतरह आर्थिक मामलों पर वर्तमान समय में कांग्रेस का स्टैंड हमेशा देश के वेल्थ क्रिएटर्स को नीचा दिखाने का, उन्हें गाली देने का रहा है। आज हम उन आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (एलपीजी) नीतियों के खिलाफ हो गए हैं, जिस देश में लागू कराने का पूरा श्रेय दुनिया ने हमें दिया है। देश में होने वाले हर विनिवेश पर पार्टी का नजरिया हमेशा नकारात्मक रहा। क्या हमारे देश में बिजनेस करके पैसा कमाना गलत है? धर्मनिरपेक्षता पर भी कांग्रेस में मतभेद 2014 के चुनावों में हार के बाद कांग्रेस ने हार के कारणों की समीक्षा के लिए वरिष्ठ नेता एके एंटनी के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई थी। एंटनी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कांग्रेस की छवि एंटी हिंदू की होती जा रही है।
पहले ऐसा नहीं था। इसमें सुधार की जरूरत है। लेकिन कांग्रेस के लिए दुर्भाग्य हैं कि सुधार के लिए कोई काम नहीं हुआ। राम मंदिर उद्धघाटन से दूर रहना पार्टी की बड़ी भूल थी। इधर जितने भी लोगों ने कांग्रेस छोड़ी है उन सभी का कहना था कि राम मंदिर का विरोध करते रहना उनके लिए संभव नहीं हो सकता। पार्टी न हिंदुओं ही नहीं मुसलमानों को भी नहीं संभाल पा रही है। सीएए के नाम पर जिस तरह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विरोध किया है उस तरह कांग्रेस नहीं कर सकी है। केरल में राहुल गांधी के खिलाफ सीएम विजयन ने सीएए को ही मुद्दा बना दिया है। जमीन से कट चुका हैं पूरा गांधी परिवार पूर्व कांग्रेस नेता गौरव वल्लभ ने अपने त्याग पत्र में लिखा,पार्टी का जमीन कनेक्ट पूरी तरह से टूट चुका है, जो नए भारत की आकांक्षा को बिल्कुल भी नहीं समझ पा रही है। इसकारण न पार्टी सत्ता में आ पा रही और ना ही मजबूत विपक्ष की भूमिका ही निभा पा रही है। इससे मेरे जैसा कार्यकर्ता हतोत्साहित होता है। बड़े नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच की दूरी पाटना बेहद कठिन है, जो कि राजनैतिक रूप से जरूरी है। जब तक एक कार्यकर्ता अपने नेता को डायरेक्ट सुझाव नहीं दे सकता, तब तक किसी भी प्रकार का सकारात्मक परिवर्तन संभव नहीं है। पार्टी के बड़े नेताओं का जमीनी कार्यकर्ताओं से कटे होने के चलते यू ट्यूबर्स की मौज हो गई है।
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