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Bengal में राइटर्स बिल्डिंग से चलेगी नई सरकार! 1777 में बनी थी यह इमारत

Bengal में राइटर्स बिल्डिंग से चलेगी नई सरकार! 1777 में बनी थी यह इमारत

इस पर अंतिम फैसला नए सीएम ही लेंगे, नबान्न नहीं होगा ठिकाना

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही सरकार के कामकाज का केंद्र भी बदलने वाला है। निवर्तमान सीएम ममता बनर्जी के 15 साल के कार्यकाल में 13 साल तक सत्ता का केंद्र रहा नबान्न अब नई सरकार का ठिकाना नहीं होगा। राज्य में चुनाव जीतने के बाद बीजेपी राज्य सचिवालय को हावड़ा से वापस कोलकाता स्थित ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग में शिफ्ट करने की योजना बना रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने नबान्न में कार्यवाहक मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला से मुलाकात की। समिक ने उन्हें सूचित किया है कि नए सीएम के शपथ लेने के बाद सचिवालय को शिफ्ट कर दिया जाएगा। बीजेपी के मुताबिक नए मुख्यमंत्री के शनिवार सुबह ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ लेने की उम्मीद है। इसके बाद नए नेता मध्य कोलकाता स्थित राइटर्स बिल्डिंग से अपना कार्यभार संभालेंगे। हालांकि, बीजेपी ने अभी तक अपने सीएम चेहरे का ऐलान नहीं किया है। रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी हमेशा से इसके ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक महत्व को देखते हुए सचिवालय को वापस राइटर्स बिल्डिंग में ले जाने की इच्छुक रही है। इस कदम का समर्थन करते हुए समिक भट्टाचार्य ने कहा कि हम 2021 से ही कह रहे हैं कि हम राइटर्स बिल्डिंग से सरकार चलाएंगे। मैंने इस साल चुनाव प्रचार के दौरान भी यह घोषणा की थी। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला नए सीएम ही लेंगे। 250 से ज्यादा सालों तक राइटर्स बिल्डिंग सत्ता का केंद्र रही है। पहले ईस्ट इंडिया कंपनी, फिर ब्रिटिश इंडिया और आजादी के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने अक्टूबर 2013 तक यहीं से कामकाज किया। रिपोर्ट के मुताबिक 2011 में पहली बार शपथ लेने के बाद ममता बनर्जी ने भी राइटर्स बिल्डिंग से ही कार्यभार संभाला था, लेकिन बाद में उन्होंने अपना सचिवालय अस्थायी तौर पर गंगा पार हावड़ा के शरत चटर्जी स्ट्रीट स्थित नबान्न में शिफ्ट कर लिया था।

ममता सरकार ने तब पुरानी इमारत में आग और आपदा से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए इसके जीर्णोद्धार के लिए करीब 200 करोड़ रुपए आवंटित किए थे। ममता ने तब इसे बारूद का ढेर बताते हुए कहा था कि सुरक्षा के लिहाज से अस्थायी जगह तलाशी जा रही है। हालांकि, इमारत का काम पूरा न होने के कारण सरकार की वहां कभी वापसी नहीं हो सकी। नवीनीकरण के तहत लोक निर्माण विभाग ने इमारत की मूल ई संरचना के बीच बने दो एनेक्सी भवनों को ध्वस्त कर दिया था, लेकिन इसके बाद काम धीमा पड़ गया। राइटर्स बिल्डिंग में मूल रूप से करीब 3 लाख वर्ग फुट का कार्यक्षेत्र था, जो तोड़े जाने के बाद घटकर 2.5 लाख वर्ग फुट रह गया। हालांकि यह जगह सीएमओ समेत कम से कम 8-10 विभागों के लिए पर्याप्त है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का कहना है कि अगर नई सरकार तुरंत वापस लौटना चाहती है, तो उसके लिए केवल ब्लॉक 1 और 2 ही उपलब्ध कराए जा सकते हैं। नया सीएमओ दूसरी मंजिल पर काम कर सकता है, जहां जीर्णोद्धार का काम पूरा हो चुका है। मूलरूप से सीएमओ पहली मंजिल पर था, जिसकी मरम्मत में अभी 6 महीने और लग सकते हैं। इस बीच, कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय नंद ने सुरक्षा व्यवस्था और नवीनीकरण कार्य का जायजा लेने के लिए बुधवार को राइटर्स बिल्डिंग का दौरा किया था। बता दें वर्ष 1777 में बनी राइटर्स बिल्डिंग को थॉमस लियोन ने डिजाइन किया था। इसका निर्माण गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स के कार्यकाल में किया गया था। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से तीन साल पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसे खरीद लिया था, जिसके बाद यह क्लर्कों के कार्यालय के रूप में इस्तेमाल होने लगी। 1906 के आसपास इस लाल रंग की शानदार इमारत को इसका खास ग्रीको-रोमन लुक मिला। डलहौजी स्क्वायर पर स्थित यह इमारत भारत और बंगाल के इतिहास की मूक गवाह रही है, लेकिन अब सरकार के यहां लौटने से पहले इसे एक गंभीर कायाकल्प की जरूरत है।

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