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  • Wednesday, 02 September 2026
‘विकास और सेवा के 2 वर्ष’ पुस्तिका में स्कूल शिक्षा को लेकर गलत जानकारी पर कांग्रेस विधायक Jaivardhan Singh ने उठाए सवाल

‘विकास और सेवा के 2 वर्ष’ पुस्तिका में स्कूल शिक्षा को लेकर गलत जानकारी पर कांग्रेस विधायक Jaivardhan Singh ने उठाए सवाल

भोपाल/ मध्यप्रदेश विधानसभा में 30 मार्च एवं 31 मार्च 2026 दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन के दौरान वितरित की गई ‘विकास और सेवा के 2 वर्ष’ नामक पुस्तिका में स्कूल शिक्षा विभाग से संबंधित प्रकाशित जानकारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय, स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव सहित विधानसभा सचिवालय को पत्र भेजकर प्रकाशित तथ्यों की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।विधायक जयवर्धन सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 30 एवं 31 मार्च 2026 को मध्यप्रदेश विधानसभा में आयोजित दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन में देश में प्रदेश की भूमिका एवं सरकार की उपलब्धियों से संबंधित साहित्य वितरित किया गया था। इसी साहित्य में ‘विकास और सेवा के 2 वर्ष’ शीर्षक से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अभिभाषण एवं सरकार की उपलब्धियों का विवरण प्रकाशित किया गया है।

परीक्षा परिणाम आने से पहले ही ‘लैपटॉप और स्कूटी योजना’ का लाभ लेने वाले छात्रों की विभाग को पहले से जानकारी कैसे - जयवर्धन सिंह ?

पत्र में पुस्तिका के पृष्ठ क्रमांक 59 पर स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रकाशित जानकारी पर विशेष आपत्ति दर्ज कराई गई है। पुस्तिका में वर्ष 2025-26 की स्थिति बताते हुए लैपटॉप योजना एवं स्कूटी योजना के माध्यम से प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को लाभान्वित किए जाने की जानकारी दी गई है।जयवर्धन सिंह ने सवाल उठाया है कि इन योजनाओं का लाभ मुख्य रूप से कक्षा 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थियों को दिया जाता है, जबकि 30-31 मार्च 2026 को आयोजित युवा विधायक सम्मेलन की तारीख तक वर्ष 2025-26 के परीक्षा परिणाम घोषित ही नहीं हुए थे। ऐसे में यह गंभीर प्रश्न है कि जब कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम ही उपलब्ध नहीं थे, तब 2025-26 के विद्यार्थियों को इन योजनाओं का लाभ मिलने संबंधी आंकड़े पुस्तिका में किस आधार पर प्रकाशित किए गए?

सरकारी पुस्तक में गलत आंकड़े प्रकाशित करना अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक

जयवर्धन सिंह ने पत्र में कहा है कि यदि परीक्षा परिणाम आने से पहले ही विद्यार्थियों को योजना का लाभ दिए जाने की जानकारी प्रकाशित की गई है, तो यह तथ्यात्मक रूप से गंभीर विसंगति है। वहीं यदि आंकड़े किसी अन्य वर्ष या पूर्व के विद्यार्थियों से संबंधित हैं तो उन्हें वर्ष 2025-26 की स्थिति बताकर प्रकाशित करना भी भ्रम उत्पन्न करने वाला है।उन्होंने मांग की है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रकाशित इन आंकड़ों का स्रोत, आधार एवं सत्यापन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि प्रदेश की जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।

‘शून्य शिक्षक’ और ‘एक शिक्षक’ वाले स्कूलों को लेकर भी सरकार के दावे पर सवाल

पत्र में जयवर्धन सिंह ने प्रदेश के उन स्कूलों का भी उल्लेख किया गया है जहां शून्य शिक्षक अथवा केवल एक शिक्षक के आधार पर स्कूल संचालित होने की स्थिति सामने आई है। विधायक ने कहा कि यदि प्रदेश में बड़ी संख्या में विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है, तो इसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बजाय गंभीर चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए।उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि पुस्तिका में शिक्षा व्यवस्था की उपलब्धियों और सुधारों का उल्लेख करते समय जमीनी स्तर पर मौजूद शिक्षक संकट की वास्तविक तस्वीर को किस प्रकार प्रस्तुत किया गया है।

2023-24 की तुलना में 2024-25 के परीक्षा परिणामों में वृद्धि के दावे पर भी मांगा आधार

विधायक जयवर्धन सिंह ने पुस्तिका में वर्ष 2023-24 की तुलना में वर्ष 2024-25 में प्रदेश के परीक्षा परिणामों में वृद्धि संबंधी जानकारी पर भी तथ्यात्मक आधार उपलब्ध कराने की मांग की है।उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उपलब्धियों के रूप में आंकड़े प्रकाशित किए जा रहे हैं तो उनके साथ वर्षवार परीक्षा परिणाम, उत्तीर्ण प्रतिशत, विद्यार्थियों की संख्या तथा संबंधित विभागीय रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, जिससे इन दावों की वास्तविकता स्पष्ट हो सके।

मुख्यमंत्री के नाम से प्रकाशित पुस्तक में गलत जानकारी और भी गंभीर विषय

जयवर्धन सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि यह सामान्य प्रचार सामग्री नहीं, बल्कि ‘विकास और सेवा के 2 वर्ष’ के नाम से मुख्यमंत्री के अभिभाषण एवं सरकार की उपलब्धियों को दर्शाने वाला साहित्य है, जिसे युवा विधायक सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण मंच पर वितरित किया गया।ऐसे में इसमें प्रकाशित किसी भी गलत अथवा अपुष्ट जानकारी की जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। यदि विभागीय स्तर पर बिना सत्यापन के आंकड़े उपलब्ध कराए गए और उन्हें पुस्तिका में प्रकाशित किया गया, तो यह प्रशासनिक गंभीरता का विषय है तथ्यों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर हो कार्रवाई

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