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  • Saturday, 22 August 2026
Vande Mataram पर कांग्रेस में कलह: 2 स्टैंजा के फैसले पर पार्टी के भीतर ही उठे सवाल

Vande Mataram पर कांग्रेस में कलह: 2 स्टैंजा के फैसले पर पार्टी के भीतर ही उठे सवाल

कार्यसमिति ने दोहराया फैसला तो सिंघवी ने दिया कानूनी तर्क


नई दिल्ली। वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस का अपना फैसला अब पार्टी के भीतर ही सवालों के घेरे में आ गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) ने पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत की सिर्फ पहले दो पैराग्राफ गाने के फैसले को दोहराया है, जिसके बाद पार्टी के कुछ नेताओं में बेचैनी है। कुछ नेताओं का मानना है कि कांग्रेस ने अनजाने में बीजेपी को वही मुद्दा दे दिया, जिस पर वह सबसे ज्यादा सहज तरीके से राजनीतिक हमला कर सकती है।

कांग्रेस के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रमुख और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने इस विवाद में कानूनी पहलू सामने रखा है। उनका कहना है कि कानून उसकी मौजूदा स्थिति के हिसाब से देखा जाना चाहिए और उन्होंने सार्वजनिक एवं निजी कार्यक्रमों के बीच अंतर बताया। सिंघवी के मुताबिक, मौजूदा कानून सरकारी आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के गायन से जुड़ी बात करता है, पार्टी के आंतरिक कार्यक्रमों के बारे में उसमें वैसी स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। कार्यसमिति के ही एक सदस्य ने कहा कि कांग्रेस को इस मुद्दे को बीजेपी की ताकत नहीं बनाना चाहिए था, जबकि छात्रों के मुद्दे और चंदा चोरी जैसे ज्यादा अहम मुद्दे मौजूद हैं। सीडब्ल्यूसी ने अपने फैसले के समर्थन में 1937 के प्रस्ताव का हवाला दिया, जिसमें महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे नेताओं ने वंदे मातरम की पहले दो पैराग्राफ के गायन का समर्थन किया था।

 

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