कॉरलिया डिजिटल हॉस्पिटल प्लेटफॉर्म, छोटे और मंझोले अस्पताल के लिए वरदान: Dr. R.K.S. Dhakad
ग्वालियर/ऐतिहासिक शहर ग्वालियर में शनिवार शाम को एक सॉफ्टवेयर लॉन्च किया गया है जो मेडिकल की दुनिया में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने जा रहा है।ग्लोबल वन कंसल्टिंग कंपनी के तहत ऑपर्च्युनिटी ग्लोबल इन्फोटेक एक ऐसी कंपनी है जो नए नए तकनीक पर जोरदार काम कर रही है। इसी प्रयास के तहत कॉरलिया डिजिटल हॉस्पिटल प्लेटफॉर्म ने ऐसा कर दिखाया है।एक क्लिक पर मरीज और डॉक्टर किसी भी पेशेंट से जुड़ी बीमारी की सारी हिस्ट्री जान सकते हैं।ऑपर्च्युनिटी ग्लोबल इन्फोटेक के डायरेक्टर ऐंड टेक लीड आशुतोष सक्सेना कहते हैं कि कोर्लिया डिजिटल आईडी प्रदान करता है जो आयुष्मान भारत योजना के तहत आता है। इसलिए किसी भी पेशेंट की पूरी जानकारी डॉक्टर कही भी बैठकर चेक कर सकते हैं।
दरअसलडिजिटल क्रांति, लोगों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया है । डिजिटल क्रांति की वजह से कई संगठन व्यवस्थित होकर कार्य कर रहे हैं । आज भी सरकारी अस्पताल चाहे वो दिल्ली का एम्स हो या किसी सुदूर प्रदेश का अस्पताल, मरीजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मेडिकल दस्तावेजों को सुरक्षित रखना होता है। मरीजों को कई अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं जिसके चलते उनका समय बर्बाद होता है और अस्पतालों के लिए भी सारी जानकारी को फिजिकल कॉपी में रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। इसमें अस्पतालों को काफ़ी संसाधन खर्च करने पड़ते हैं जो वहन करना आसान नहीं होता है।
कॉरलिया मैनेज्ड डिजिटल हॉस्पिटल प्लेटफार्म अस्पतालों को डिजिटल तरीके से आधुनिक बनाने में मदद करेगा और अस्पतालों को अलग सॉफ्टवेयर या डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी रकम खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।कॉरलिया का मुख्य उद्देश्य एक सेंट्रलाइज्ड सिस्टम बहाल करना जो मरीजों से जुड़ी सारी जानकारी एक जगह पर रखेगा और एक क्लिक पर मरीजों से जुड़ी सारी जानकारी उपलब्ध करा सकेगा। ये जानकारी किसी भी मरीज का दुनिया के किसी कोने से एक क्लिक पर देखा जा सकता है। जाहिर है मरीज को अब अपनी सारी बीमारी का दस्तावेज साथ रखने की जहमत उठानी नहीं पड़ेगी।
हड्डी रोग के नामचीन विशषज्ञ और वर्तमान में गजरा राजा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ आर के एस धाकड़ भी मानते हैं कि कॉरलिया मरीजों के रजिस्ट्रेशन से लेकर, अपॉइंटमेंट, मेडिकल रिकॉर्ड, बिलिंग वगैरह का समाधान अलग अलग सिस्टम की जगह एक सिस्सटम पर कर सकेगा । ये सिस्टम अस्पताल प्रशासन और मरीजों के लिए अत्यंत सरल होगा। हड़्डी रोग विशेषज्ञ कहते हैं कि अस्पतालों के लिए पेपर का रिकॉर्ड्स का रखना काफी मुश्किल भरा काम होता है और इसमें अस्पताल का संसाधन काफी बर्बाद होता है।इसलिए कॉर्लिया मैनेज्ड डिजिटल हॉस्पिटल प्लेटफार्म सिस्टम की वजह से सारे रिकॉर्ड्स एक जगह मिल जाएंगे और ये अस्पताल की गुणवत्ता बढ़ाने में कारगर साबित होगा।गजरा राजा मेडिकल कॉलेज के डीन और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ धाकड़ ये भी कहते हैं कि देश आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत एक कनेक्टेड हेल्थ केयर की ओर बढ़ रहा है ।इससे अस्पतालों को पर्याप्त समय मिलेगा और अस्पताल अपने मरीजों की जानकारी को कम संसाधन में सुरक्षित रख सकेगा।
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