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  • Tuesday, 11 August 2026
प्रशांत में उठा डॉल्फिन तूफान: China and Japan में हड़कंप, भारत पर अप्रत्यक्ष असर

प्रशांत में उठा डॉल्फिन तूफान: China and Japan में हड़कंप, भारत पर अप्रत्यक्ष असर

बीजिंग। पश्चिमी प्रशांत महासागर में उठा महाशक्तिशाली तूफान डॉल्फिन इनदिनों चीन, जापान और ताइवान के लिए बड़ी आफत बनकर उभरा है। 216 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार तक पहुंच चुकी इसकी हवाएं इन देशों में भारी तबाही मचा रही हैं, जिसके चलते हजारों उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं और लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। विशेषज्ञों ने भारत के मानसून पर भी इसके अप्रत्यक्ष प्रभाव की आशंका जाहिर की गई है, जिससे चिंता बढ़ गई है। जापान के दक्षिणी ओकिनावा क्षेत्र में इस तूफान का असर पहले ही दिखाई दे चुका है, जहां तेज हवाओं के कारण पांच बुजुर्ग लोग घायल हो गए और करीब 14 हजार इमारतों की बिजली गुल हो गई। अब डॉल्फिन चीन के पूर्वी तट की ओर तेजी से बढ़ रहा है। शंघाई में 1300 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जबकि चीन ने करीब तीन लाख लोगों को एहतियातन दूसरी जगहों पर शिफ्ट किया है।


चीन के झेजियांग और फुजियान प्रांतों को विशेष रूप से सतर्क किया गया है, जहां बंदरगाहों का संचालन रोक दिया गया है और यात्रियों के लिए चलने वाले 162 फेरी रूट निलंबित कर दिए गए हैं। निंगबो में भी स्कूलों सहित अन्य शैक्षणिक गतिविधियां रोक दी गई हैं और पानी से जुड़ी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ताइवान ने भी एहतियातन 63 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द की हैं। मौसम विभाग ने पूर्वी झेजियांग के कुछ हिस्सों में 600 मिलीमीटर से भी अधिक भारी बारिश की आशंका जाहिर की गई है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। तूफान डॉल्फिन के कारण पूर्वी चीन के तटीय इलाकों में कई दिनों तक तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहने की चेतावनी जारी की गई है, जिससे परिवहन और सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। यह तूफान अपने रास्ते में तेज समुद्री लहरों का खतरा भी पैदा कर रहा है।


हालांकि डॉल्फिन का सीधा खतरा भारत पर नहीं है, मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव भारतीय मानसून प्रणाली पर पड़ सकता है। यह शक्तिशाली तूफान पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र से बड़ी मात्रा में गर्मी और नमी को अपनी ओर खींच सकता है। इससे उन मौसम प्रणालियों के लिए उपलब्ध नमी प्रभावित हो सकती है, जो बंगाल की खाड़ी और भारत में बारिश को बढ़ावा देती हैं। परिणामस्वरूप, मध्य और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में मानसून की बारिश कुछ समय के लिए कमजोर पड़ सकती है और अस्थायी शुष्क अवधि देखने को मिल सकती है। हालांकि, यह अनुमान है कि डॉल्फिन के कमजोर पड़ने या आगे बढ़ जाने के बाद मानसूनी गतिविधियां फिर से सामान्य हो जाएंगी।

 

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