Pakistan की अफगानिस्तान सीमा पर एयरस्ट्राइक में टीटीपी के दर्जनों लड़ाके ढेर
इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने रविवार तड़के अफगानिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में एक बड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए हवाई हमले (एयरस्ट्राइक) किए हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों का मुख्य उद्देश्य प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकानों को ध्वस्त करना था। बताया जा रहा है कि इस भीषण स्ट्राइक में टीटीपी के दर्जनों लड़ाके मारे गए हैं। सोशल मीडिया पर इस सैन्य कार्रवाई के कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें विस्फोटों की तीव्रता और हमलों के पैमाने को साफ देखा जा सकता है। यह कार्रवाई सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़े सैन्य घटनाक्रम के रूप में देखी जा रही है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने यह कदम शनिवार को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में हुए आत्मघाती हमलों का बदला लेने के लिए उठाया है। शनिवार को एक खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए अभियान के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों के काफिले को निशाना बनाया था। इस मुठभेड़ में सेना के दो वीर जवानों, जिनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक सिपाही शामिल थे, ने अपनी जान गंवा दी थी। हालांकि, सुरक्षाबलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए एक आत्मघाती हमलावर सहित पांच आतंकवादियों को मार गिराया था, जिससे नागरिकों पर होने वाले एक बड़े हमले की साजिश को नाकाम कर दिया गया था।
इसी हमले के जवाब में अब सीमा पार आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए गए हैं। पाकिस्तान सरकार ने हाल के दिनों में टीटीपी के लिए फितना-अल-ख्वारिज शब्द का इस्तेमाल करना शुरू किया है। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, आतंकवादी समूह लगातार सीमा पार सुरक्षित ठिकानों का उपयोग कर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। कुछ दिन पहले ही मलांगी क्षेत्र में एक मदरसे के पास हुए भीषण धमाके और गोलीबारी ने इलाके में दहशत फैला दी थी, जिसमें इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा था। इन बढ़ती हिंसक गतिविधियों ने पाकिस्तान को सीमा पार जाकर कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव और गहरा सकता है। पूर्व में भी जब पाकिस्तान ने अफगान सीमा के भीतर हवाई हमले किए हैं, तो दोनों देशों के बीच सीमा पर भारी गोलीबारी और युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। तालिबान शासन अक्सर अपनी धरती पर विदेशी सैन्य हस्तक्षेप का कड़ा विरोध करता रहा है। ऐसे में इस ताजा हमले के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है और आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच संबंधों में और कड़वाहट आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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