‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ से पूर्व आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी: Arshad
मुंबई। बॉलीवुड फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस ब्लॉकबस्टर में अभिनेता अरशद वारसी ने ‘सर्किट’ का ऐसा यादगार किरदार निभाया कि वह मुख्य अभिनेता संजय दत्त के मुन्ना भाई के रोल को भी बराबरी की टक्कर देते नजर आए। एक इंटरव्यू में अरशद वारसी ने माना कि इस फिल्म ने उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। अरशद वारसी ने याद किया कि ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ से पहले उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उन्होंने कहा कि उस समय वह मुश्किल से कुछ कमा पाते थे और जो भी पैसे मिलते, उसी में काम कर लेते। वह बताते हैं कि वह कभी पैसों को लेकर लड़ते या बहस नहीं करते थे। लेकिन जब ‘सर्किट’ का रोल आया, सब कुछ बदल गया। फिल्म की सफलता के तुरंत बाद उन्हें निर्देशक विपुल शाह का फोन आया, जिसने उनकी सोच ही बदल दी। अरशद के मुताबिक, विपुल शाह ने उनसे बेहद गंभीर लहजे में कहा, “अगर तुमने 1 करोड़ रुपये से एक पैसा भी कम लिया, तो मैं तुम्हारे पीछे पड़ जाऊंगा।” उन्होंने अरशद को यह भी बताया कि उन्हें शायद अंदाज़ा ही नहीं है कि वह कितने टैलेंटेड हैं।
यह वह पहला वक्त था जब अरशद ने अपने मैनेजर से कहा कि अब वह किसी भी प्रोजेक्ट के लिए 1 करोड़ की फीस मांगेंगे। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी फीस बढ़ती गई और उनका नाम इंडस्ट्री में मजबूत पहचान बन गया। दर्शक उन्हें ‘अरशद’ की जगह ‘सर्किट’ के नाम से पुकारने लगे। दिलचस्प बात यह है कि अरशद वारसी सर्किट का रोल लगभग नहीं करने वाले थे। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें इस किरदार पर शक था क्योंकि वह संजय दत्त के पीछे खड़े गुंडों में से एक जैसा लगता था। उन्हें यह डर भी था कि कहीं यह उनका आखिरी रोल न बन जाए। कई एक्टर्स इस भूमिका को ठुकरा चुके थे, तब जाकर यह अरशद तक पहुंचा। वह साफ कहते हैं कि अगर उस समय उनकी जिंदगी थोड़ी बेहतर चल रही होती, तो शायद वह भी इस किरदार को मना कर देते। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। आज सर्किट भारतीय सिनेमा के सबसे आइकॉनिक कॉमिक किरदारों में से एक है।
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