जंग का असर: Global oil Market में भूचाल, 80 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
दुबई। ईरान पर हुए हालिया हमलों और उसके बाद खाड़ी देशों में भड़के जवाबी संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। मध्य पूर्व में पैदा हुए इस नए सुरक्षा संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। ईरान द्वारा दुबई, अबू धाबी, कतर, बहरीन और सऊदी अरब जैसे प्रमुख क्षेत्रों को निशाना बनाए जाने के बाद निवेशकों में घबराहट फैल गई है, जिसका सीधा असर तेल की सप्लाई और कीमतों पर पड़ा है। इस संघर्ष का सबसे तात्कालिक और गहरा प्रभाव कच्चे तेल की बेंचमार्क कीमतों पर हुआ है। शुक्रवार को जो ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था, वह सोमवार को 12 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। साल 2026 के शुरुआती दो महीनों में ही तेल की कीमतों में करीब 19 प्रतिशत की तेजी आ चुकी थी, लेकिन ताजा हमलों ने इसे पिछले साल जून के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इसी तरह, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में भी 8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 70 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। ईरान भले ही भू-राजनीतिक दबाव का सामना कर रहा हो, लेकिन वैश्विक तेल मानचित्र पर उसकी भूमिका बेहद अहम है। वह ओपेक+ गठबंधन का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश है और समूह के कुल उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 12 प्रतिशत है। प्रतिदिन 3.3 मिलियन बैरल तेल उत्पादन की क्षमता रखने वाला ईरान वैश्विक आपूर्ति का लगभग 3 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करता है।
ऐसे में ईरान की तेल रिफाइनरियों या सप्लाई रूट पर कोई भी आंच पूरी दुनिया के ईंधन बाजार को प्रभावित कर रही है।वर्तमान संकट का सबसे संवेदनशील बिंदु होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है। दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20% और भारी मात्रा में एलएनजी इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसका इस मार्ग को बंद करने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है, लेकिन युद्ध की स्थिति में इस चोक पॉइंट के बंद होने की आशंका मात्र से बाजार में हड़कंप है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो तेल की कीमतें बहुत जल्द 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। बढ़ते दबाव के बीच ओपेक प्लस देशों ने अपनी मासिक बैठक में आपूर्ति बढ़ाने का निर्णय लिया है। सऊदी अरब और रूस सहित समूह के प्रमुख सदस्य अप्रैल से प्रतिदिन 2,06,000 बैरल अतिरिक्त तेल की आपूर्ति करेंगे। यह फैसला बाजार में स्थिरता लाने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि युद्ध के कारण उत्पन्न हुई कमी की भरपाई की जा सके। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम पर टिकी हैं, क्योंकि तेल की ये बढ़ती कीमतें वैश्विक महंगाई को नए स्तर पर ले जा सकती हैं।
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