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व्यक्तिगत पीड़ा को बढ़ाकर पेश करना सही दृष्टिकोण नहीं : Adah Sharma

व्यक्तिगत पीड़ा को बढ़ाकर पेश करना सही दृष्टिकोण नहीं : Adah Sharma

मुंबई। सच्ची घटनाओं पर आधारित आगामी मराठी फिल्म गजरा के जरिए अभिनेत्री अदा शर्मा पहली बार मराठी सिनेमा में अपनी अदाकारी का प्रदर्शन करेंगी। अदा शर्मा का मानना है कि जब किसी वास्तविक घटना को बड़े पर्दे पर उतारा जाता है, तो फिल्म निर्माता और कलाकारों दोनों की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। उनका मुख्य उद्देश्य उन वास्तविक लोगों के दर्द, संघर्ष और अनुभवों को पूरी संवेदनशीलता के साथ दर्शकों तक पहुंचाना होता है, जिन्होंने उन परिस्थितियों का सामना किया है। एक विशेष बातचीत में अदा शर्मा ने सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्मों के महत्व और चुनौतियों पर खुलकर बात की। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब किसी व्यक्ति के वास्तविक अनुभव या उसकी पीड़ा को सिनेमाई रूप दिया जाता है, तो उस कहानी के साथ न्याय करना और पूरी संवेदनशीलता बरतना बेहद आवश्यक है। दर्शकों पर गहरा असर डालने के लिए किसी की व्यक्तिगत पीड़ा को बढ़ा-चढ़ाकर या सनसनीखेज तरीके से प्रस्तुत करना कभी भी सही दृष्टिकोण नहीं हो सकता। 


अदा के अनुसार, वास्तविक घटनाओं पर आधारित कहानी कहने के साथ एक बहुत बड़ी नैतिक और कलात्मक जिम्मेदारी जुड़ी होती है। हमारा लक्ष्य केवल दर्शकों को चौंकाना नहीं होता, बल्कि उन्हें यह समझाना होता है कि कहानी के किरदार किन भावनात्मक उथल-पुथल और कठिन परिस्थितियों से गुजरे हैं। अगर दर्शक किसी किरदार के दर्द और उसकी भावनाओं को गहराई से महसूस कर पाते हैं, तभी ऐसी कहानी अपने वास्तविक उद्देश्य में सफल मानी जा सकती है और समाज पर एक सार्थक प्रभाव छोड़ पाती है। अभिनेत्री ने आगे स्पष्ट किया कि एक कलाकार के रूप में वे किसी और की जिंदगी में कुछ समय के लिए मेहमान बनते हैं।इसलिए उनकी निरंतर कोशिश रहती है कि उस व्यक्ति की भावनाओं, अनुभवों और संघर्षों को जितनी हो सके उतनी ईमानदारी और सच्चाई के साथ पर्दे पर जीवंत किया जा सके। 


अदा शर्मा ने यह भी कहा कि कई बार वास्तविक जीवन में घटित होने वाली घटनाएं फिल्मों की काल्पनिक कहानियों से भी कहीं अधिक नाटकीय और अविश्वसनीय प्रतीत होती हैं। लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि फिल्मों में कहानी को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए कई चीजों को जोड़ा या बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, लेकिन सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्मों में कई बार इसके ठीक विपरीत करना पड़ता है, जहाँ अति-नाटकीय वास्तविकताओं को संतुलित करना पड़ता है ताकि वे विश्वसनीय लगें। यह फिल्म गजरा श्रेयस जाधव के निर्देशन में बन रही है। फिल्म की विस्तृत कहानी और विषयवस्तु को लेकर अभी ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है।

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