फिल्म बनाना कहानी सुनाने की आधुनिक कला है: Aamir Khan
मुंबई। हाल ही में अपनी नई फिल्म एक दिन के प्रमोशन के दौरान अभिनेता और फिल्म निर्माता आमिर खान ने फिल्ममेकिंग और स्टोरीटेलिंग को लेकर विस्तार से बातचीत की। आमिर खान ने कहा है कि फिल्मों की सबसे बड़ी ताकत उनकी कहानी होती है। उनका मानना है कि तकनीक, बड़े सेट और शानदार विजुअल्स के बावजूद अगर कहानी मजबूत नहीं होगी तो दर्शक फिल्म से जुड़ाव महसूस नहीं कर पाएंगे। एक कार्यक्रम में अभिनेता और कॉमेडियन जाकिर खान के साथ बातचीत करते हुए आमिर खान ने कहा कि फिल्म बनाना दरअसल कहानी सुनाने की एक आधुनिक कला है। उन्होंने कहा कि इंसान हजारों वर्षों से एक-दूसरे को कहानियां सुनाता आ रहा है। पुराने समय में जब किताबें नहीं थीं, तब लोग बैठकर किस्से और कहानियां साझा किया करते थे। आज भी वही परंपरा जारी है, लेकिन अब कहानी सुनाने की जगह उसे दिखाने का तरीका विकसित हो गया है। आमिर खान ने कहा कि पहले केवल शब्दों के जरिए कहानी कही जाती थी, जबकि अब फिल्मों में कैमरा, संगीत, ध्वनि और कलाकारों की मदद से भावनाओं को जीवंत रूप दिया जाता है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माता आज किसी भी दृश्य को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं और कलाकार अपने अभिनय से किरदारों को वास्तविक बना देते हैं।
हालांकि इन सभी चीजों के बावजूद कहानी सबसे महत्वपूर्ण तत्व बनी रहती है। उन्होंने कहा कि अगर कहानी दिलचस्प और भावनात्मक रूप से मजबूत नहीं होगी तो दर्शक फिल्म से जुड़ नहीं पाएंगे। चाहे फिल्म कितने भी बड़े बजट में बनाई जाए या उसमें कितनी भी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, यदि कहानी दर्शकों को बांधकर नहीं रख सकेगी तो लोग जल्दी ही रुचि खो देंगे। आमिर खान के अनुसार दर्शक हमेशा ऐसी कहानी देखना चाहते हैं, जो उनके दिल को छू सके और लंबे समय तक याद रहे। आमिर खान की आगामी फिल्म ‘एक दिन’ इन दिनों काफी चर्चा में है। इस फिल्म में उनके बेटे जुनैद खान और अभिनेत्री साई पल्लवी मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म में जुनैद खान एक शांत और शर्मीले युवक दिनेश उर्फ डीनो का किरदार निभा रहे हैं, जो अपने ऑफिस में काम करने वाली खुशमिजाज लड़की मीरा को पसंद करने लगता है। मीरा का किरदार साई पल्लवी निभा रही हैं। हालांकि दिनेश अपने दिल की बात उससे कह नहीं पाता। फिल्म की कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है, जब जापान में मीरा एक सड़क हादसे का शिकार हो जाती है। हादसे के बाद उसकी याददाश्त प्रभावित हो जाती है और उसे केवल वही व्यक्ति याद रहता है, जिसने उसकी जान बचाई थी। वह व्यक्ति दिनेश होता है। इसके बाद फिल्म की कहानी भावनात्मक मोड़ लेती है।
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