Hospital में धधकने लगी आग, आईसीयू में दम घुटने से 4 मरीजों की मौत
दिल्ली की होटल के बाद मुजफ्फरपुर का अस्पताल बना आग का गोला
मुजफ्फरपुर। दिल्ली के होटल में लगी आग ठीक से शांत भी नहीं हुई थी कि बिहार के मुजफ्फरपुर शहर के ब्रम्हपुरा इलाके में स्थित निजी प्रसाद हॉस्पिटल में गुरुवार तड़के एक हृदयविदारक हादसा सामने आ गया। जहां अस्पताल के आईसीयू (सघन चिकित्सा कक्ष) में भीषण आग लगने से चार मरीजों की दर्दनाक मौत हो गई। इस भयावह आग की घटना में कई अन्य लोग गंभीर रूप से झुलसकर जख्मी हो गए हैं। हालांकि स्थानीय स्तर पर मृतकों की संख्या 10 होने की चर्चा है, लेकिन जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने आधिकारिक तौर पर अब तक 4 मरीजों के मरने की पुष्टि की है। घटना की गंभीरता को देखते हुए हताहतों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद से ही मौके पर राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। फायर ब्रिगेड, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें स्थिति को संभालने में जुटी हुई हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर करीब 20 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। हादसे की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) समेत जिले के तमाम आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। अस्पताल परिसर के पास परिजनों तथा स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई है, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बलों को तैनात किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा सुबह लगभग 3:20 बजे हुआ। आग अस्पताल की चौथी मंजिल पर स्थित आईसीयू में लगी, जहां उस समय 15 से अधिक मरीज भर्ती थे, जबकि फायर फाइटिंग टीम ने इसकी संख्या लगभग 25 बताई है।
ये सभी मरीज पिछले करीब एक सप्ताह से वहां गंभीर स्थिति में भर्ती थे। शुरुआती जांच में दुर्घटना का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, जिससे वेंटिलेटर उपकरणों में अचानक धमाके के साथ आग लग गई। आग लगते ही पूरे आईसीयू वार्ड में घना और जहरीला धुआं भर गया।इस भयावह हादसे ने अस्पताल की फायर फाइटिंग व्यवस्थाओं की कलई खोलकर रख दी है। आग लगने के समय अस्पताल का मुख्य फायर हाइड्रेंट सिस्टम फेल रहा। वार्ड में कुछ फायर एक्सटिंग्विशर जरूर थे, लेकिन उन्हें संचालित करने वाला कोई कर्मी मौजूद नहीं था। इस घोर लापरवाही के कारण अस्पताल परिसर में चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। जांच में लापरवाही की बात सामने आई तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आईसीयू में कोई भी अटेंडेंट मौजूद नहीं था एक प्रत्यक्षदर्शी और मरीज के परिजन ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के वक्त आईसीयू में कोई भी अटेंडेंट मौजूद नहीं था। जब आग भड़की, तो मरीजों के परिजन खुद ही जान जोखिम में डालकर अपनों को बाहर निकालने की जद्दोजहद में लग गए, लेकिन आग बुझाने के लिए अस्पताल का कोई भी कर्मी वहां दिखाई नहीं दिया। धुएं के गुबार के बीच लाचार मरीज और उनके परिजन तड़पने और मदद के लिए चिल्लाने लगे। जान बचाने की होड़ में अस्पताल के विभिन्न तल्लों पर मौजूद लोग और कर्मचारी भी बाहर भाग निकले। परिजनों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए कुछ शवों को इधर-उधर कर दिया गया है। आईसीयू में भर्ती अन्य घायल मरीजों को तुरंत पास के दूसरे अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
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