छोटी सी Medaka fish दिन में 27 बार बनाती है संबंध: शोध
टोक्यो। वैज्ञानिकों ने मेडाका नामक एक छोटी मछली के प्रजनन पैटर्न पर एक दिलचस्प शोध किया है। जापान की ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने दावा किया कि काफी छोटे साइज की यह मछली प्रजनन काल में एक दिन में 27 बार तक संबंध बना सकती है। लगातार संबंध बनाने की क्रिया का इसके शुक्राणुओं की गुणवत्ता पर गहरा असर पड़ता है, जिससे उनकी गति और निषेचन दर में भारी गिरावट आती है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि 10 बार लगातार मेटिंग के बाद शुक्राणुओं की संख्या और गति दोनों तेजी से गिर जाती हैं। इससे नर मछली के जीन अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की संभावना कम हो जाती है। मेडाका मछली पानी में बाहरी निषेचन के जरिए अंडे देती है। इस प्रक्रिया में नर और मादा मछली एक ही समय पर अपने शुक्राणु और अंडे पानी में छोड़ते हैं। पानी के बहाव में शुक्राणु और अंडे बहुत तेजी से अलग हो सकते हैं, इसलिए निषेचन तभी सफल होता है जब शुक्राणु तेजी से अंडे तक पहुंचें। इस प्रकार, शुक्राणुओं की गति सीधे तौर पर नर मछली की प्रजनन सफलता से जुड़ी है। अगर शुक्राणु सुस्त होंगे, तो निषेचन पूरी तरह विफल हो सकता है।
इस स्टडी को असिस्टेंट प्रोफेसर युकी कोंडो और प्रोफेसर सातोशी अवाता की टीम ने लीड किया। उन्होंने लैब में मछलियों के दो अलग-अलग समूह बनाए। पहले टैंक में एक नर और एक मादा मछली को रखा गया, वहीं दूसरे टैंक में एक नर के साथ 15 मादा मछलियों को रखा गया, ताकि नर लगातार मेटिंग कर सके। मेटिंग की पुष्टि होने के बाद मादा मछलियों को हटा दिया गया और वैज्ञानिकों ने नर मछलियों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता का आकलन किया। उन्होंने यह देखा कि बार-बार मेटिंग से शुक्राणुओं की तैराकी गति पर क्या असर पड़ता है। इस टेस्ट के नतीजे काफी चौंकाने वाले थे। जिन नर मछलियों ने लगातार मेटिंग की थी, उनके शुक्राणुओं की गति में भारी कमी पाई गई। शुक्राणु सक्रिय होने के शुरुआती 30 सेकंड में उनकी तैराकी गति 20 प्रतिशत तक गिर गई। यह तुलना उन मछलियों से की गई जिन्होंने सिर्फ एक बार मेटिंग की थी।
हालांकि, 40 सेकंड के बाद दोनों समूहों के शुक्राणुओं की गति में कोई खास अंतर नहीं दिखा। इसके अलावा, सिंगल मेटिंग वाले 12 नर मछलियों से कुल 2,538 शुक्राणु मिले, जबकि मल्टीपल मेटिंग वाले 10 नरों से सिर्फ 1,265 शुक्राणु दर्ज किए गए। इससे साफ है कि ज्यादा मेटिंग से शुक्राणुओं की संख्या भी लगभग आधी रह जाती है। इस रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने कई अहम बातें साझा की हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर युकी कोंडो ने कहा, पुरानी स्टडी में सिर्फ शुक्राणुओं की मात्रा पर ध्यान दिया गया था, लेकिन हमारे नतीजे बताते हैं कि शुक्राणुओं की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है। हमें उम्मीद है कि इससे जानवरों की प्रजनन रणनीतियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
सुदामा/ईएमएस 27 जुलाई 2026
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