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  • Thursday, 29 October 2026
Germany अब अमेरिका की नहीं, यूक्रेन की बनाई मिसाइल खरीदेगा

Germany अब अमेरिका की नहीं, यूक्रेन की बनाई मिसाइल खरीदेगा

कीव। यूरोप के डिफेंस मार्केट में एक बड़ी खबर ने हलचल मचा दी है। अपनी जबरदस्त इंजीनियरिंग और अत्याधुनिक हथियारों के लिए मशहूर जर्मनी अब अमेरिका की नहीं, बल्कि यूक्रेन की बनाई मिसाइल खरीदने जा रहा है। जर्मन सेना पहली बार यूक्रेन की ‘बार्स’ मिसाइल का परीक्षण करने की तैयारी में है। अगर यह दांव सही बैठा, तो जर्मनी ऐसी सैकड़ों मिसाइलों का बड़ा ऑर्डर देगा। यह कदम दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में शुमार जर्मनी की एक नई और सोची-समझी रक्षा रणनीति का हिस्सा है, जिससे सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जर्मनी को यूक्रेन के इस हथियार की जरूरत क्यों पड़ गई? जर्मन सरकार आने वाले कुछ हफ्तों में बार्स मिसाइल के पहले बैच को खरीदने के लिए एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर करने की तैयारी में है। इन मिसाइलों का इस्तेमाल सबसे पहले जर्मन सेना अपनी तकनीकी और टेस्टिंग के लिए करेगी। अगर अगले साल की शुरुआत में होने वाले परीक्षण सफल रहते हैं, तो जर्मनी सैकड़ों मिसाइलों का बड़ा ऑर्डर दे सकता है। यह कदम केवल हथियार खरीद नहीं, बल्कि रूस के खिलाफ यूरोप की अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि बार्स मिसाइलें अब सिर्फ यूक्रेन में नहीं, बल्कि पिछले कुछ महीनों से जर्मनी के अंदर ही एक संयुक्त यूक्रेनी-जर्मन कंपनी द्वारा बनाई जा रही हैं, हालांकि सुरक्षा कारणों से इस पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया है।

जर्मनी द्वारा वित्तपोषित इस मेक-इन-जर्मनी बार्स मिसाइल का पहला बैच अक्टूबर में यूक्रेन को सौंपा भी जा चुका है। अब यही जॉइंट वेंचर जर्मन सेना के अपने इस्तेमाल के लिए उत्पादन शुरू करेगा। यूक्रेन में ‘बार्स’ को ‘ड्रोन मिसाइल’ भी कहा जाता है, लेकिन तकनीकी रूप से जर्मन सेना इसे एक ‘लो-कॉस्ट क्रूज मिसाइल’ मानती है। यह जेट इंजन से चलने वाला एक बेहद घातक हथियार है। यह मिसाइल 1000 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों को सटीकता से निशाना बना सकती है और अलग-अलग मॉडिफिकेशन के हिसाब से 105 किलोग्राम तक का बारूद ले जाने में सक्षम है। यह मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़कर दुश्मन के रडार से बचते हुए अपने टारगेट पर सटीक प्रहार कर सकती है। जर्मनी सिर्फ बार्स मिसाइल पर ही दांव नहीं लगा रहा है, बल्कि इसके साथ ही जर्मन सेना अमेरिकी स्टार्टअप ‘कोवेनेंट’ की बनाई ‘एंथम’ क्रूज मिसाइल के एक छोटे बैच का भी परीक्षण करने वाली है। जानकारों के अनुसार, अमेरिका की टॉमहॉक मिसाइल की कीमत लगभग 40 लाख से 60 लाख डॉलर के बीच होती है।

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