Israel Elections: क्या नेतन्याहू की हार से रुक जाएगा ईरान युद्ध?
तेलअवीव। इजरायल में आज (मंगलवार को) आम चुनाव हो रहे हैं। मुकाबला प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी गादी आइजनकोट के बीच है। इस चुनाव के नतीजों को लेकर एक बड़ा सवाल यह है कि यदि नेतन्याहू चुनाव हार जाते हैं, तो क्या इससे ईरान के साथ इजरायल के सैन्य रवैये में कोई बदलाव आएगा? हालांकि, जानकारों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद ईरान को लेकर इजरायल की नीति में कोई बड़ा परिवर्तन आने की संभावना कम है। गाजा पर हमले के बाद पहली बार चुनावी परीक्षा दे रहे बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रचार के दौरान जनता से उन्हें फिर से चुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर काम खत्म करना है तो उनकी सरकार फिर से बननी जरूरी है। नेतन्याहू ने दावा किया कि केवल वही अमेरिका को ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए मजबूर कर सकते हैं। नेतन्याहू के कार्यकाल में इजरायल ने गाजा के बाद लेबनान और फिर ईरान पर भी हमले किए हैं।
हालांकि, अंदरूनी तस्वीर कुछ अलग है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल ने साथ मिलकर हमला जरूर किया था, लेकिन बीते कुछ समय से दोनों देशों के बीच प्रतिबंधों और टैरिफ को लेकर असंतोष दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि इजरायल कई महीनों से ईरान युद्ध से दूर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली प्रधानमंत्री ने चुनाव से पहले ईरान पर जोरदार हमला करने के लिए अमेरिका पर दबाव बनाने का प्रयास किया था, लेकिन अमेरिका इसके लिए तैयार नहीं हुआ। हालांकि, नेतन्याहू के कार्यालय ने इन रिपोर्टों को खारिज किया है। इजरायल की जनता भी किसी लंबे युद्ध में नहीं पड़ना चाहती है। ऐसे में यदि प्रधानमंत्री बदलते हैं, तो नए प्रधानमंत्री युद्ध को लेकर अधिक सावधान रहेंगे।नेतन्याहू के सामने मुख्य प्रतिद्वंद्वी गादी आइजनकोट इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख रह चुके हैं। वह खुद को एक ज्यादा जिम्मेदार और जानकार व्यक्ति के रूप में जनता के सामने रख रहे हैं। आइजनकोट अमेरिकी सहयोग की बात करते हैं और डोनाल्ड ट्रंप की भी तारीफ करते हैं। जानकारों का कहना है कि इजरायल में सत्ता परिवर्तन भी अमेरिका-इजरायल सुरक्षा संबंधों में कोई बदलाव लाने वाला नहीं है। क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नेतन्याहू और उनके प्रतिद्वंद्वियों के विचार मिलते-जुलते हैं। ऐसे में नेतन्याहू हार भी जाते हैं, तब भी ईरान के साथ इजरायल का रवैया बदलने वाला नहीं है। आइजनकोट के समर्थक मानते हैं कि नेतन्याहू ईरान युद्ध को चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। आइजनकोट के नेतृत्व वाली सरकार भी ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को रोकने का दबाव बना सकती है। अंतिम रूप से, ईरान के मामले में अमेरिका की ही चलने वाली है। ऐसे में इसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति का फैसला इजरायल से कहीं ज्यादा मायने रखता है।
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