Hamas chief के बेटे ने कहा, हमेशा मुसलमानों की ओर से ही हिंसा क्यों होती है, भारतीयों और खासकर हिन्दुओं की जमकर तारीफ की
न्यूयॉर्क। फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास की शुरुआत करने वाले सदस्यों में से एक शेख हसन युसूफ के बेटे मोसाब हसन फिर से सुर्खियों में हैं। मोसाब से उनके पिता ने कई साल पहले नाता तोड़ लिया था। पिछले दिनों उन्होंने एक इंटरव्यू में भारतीय और खासकर की हिंदुओं की जमकर तारीफ की है। मोसाब इस बात से काफी खुश हैं कि भारतीयों ने विशेषकर हिंदू समुदाय ने हमास जैसे आतंकी संगठन के खिलाफ आवाज उठाई है। मोसाब को लोग उनकी एक किताब सन ऑफ हमास की वजह से काफी जानते हैं।मोसाब ने कहा है कि मुसलमान कभी भी दूसरे समुदायों के साथ नहीं रह सकते हैं और वे ऐसा चाहते ही नहीं हैं। मोसाब ने कहा, हिंदुओं को कोई समस्या नहीं है, ईसाई और यहूदी भी साथ रह लेते हैं। तब फिर सवाल उठता है कि सिर्फ मुसलमानों की ओर से ही हमेशा हिंसा क्यों होती है। मुझे इस दुनिया में किसी से कोई समस्या नहीं है, भारतीयों, ईसाईयों और यहूदियों को नहीं है और सभी एक साथ रहते हैं। मोसाब ने कहा कि उन्होंने इस्लामवादी विचारधारा को खारिज कर और हिंसा को ना कहने की वजह से उन्हें काफी कुछ झेलना पड़ा जो कि मौत के समान था।
मोसाब के शब्दों में, मेरे पूरे देश ने मुझसे किनारा कर लिया। मुझे शैतान करार दिया। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि मैंने हिंसा, खूनखराबा और आत्मघाती हमलों को ना कहा। वे हर उस इंसान के साथ ऐसा ही करते हैं, जो उनके तरीकों को नहीं मानता है। मैं दोनों पक्षों को जानता हूं और इस आधार पर मैं कहता हूं कि हमें इजरायल के पीछे एकजुट होना होगा।यूसुफ ने कहा कि हमास की मानसिकता को खत्म करने की जरूरत है। उन्हें यह बताने की जरूरत है कि यह जीवन जीने का तरीका नहीं है। वे काफी क्रूर हैं। धरती केवल हमास या मुसलमानों की नहीं है।मोसाब ने कहा, भारत में मेरी सेना, जो लोग कृष्ण और गीता और उपनिषदों को समझते हैं, उन्हें कमर कसने और दुनिया में इस अल्पसंख्यक को दिखाने की जरूरत है कि इस्लामिक सोच हरगिज स्वीकार नहीं की जाएगी। जिस तरह से वे हिंसा फैलाते हैं और जिस तरह से वहां अपना एजेंडा हासिल करना चाहते हैं, वह मंजूर नहीं है। भारतीयों को आगे बढ़ना चाहिए, हिंसा के रास्ते नहीं। लेकिन उन्हें दृढ़ रहना चाहिए और किसी भी प्रकार के इस्लामी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करना चाहिए। मोसाब ने हमास छोड़ने के बाद शिन बेट के लिए मुखबिर के तौर पर 10 साल वर्षों तक काम किया है। शिन बेट इजरायल की वह आतंरिक सुरक्षा एजेंसी है जो हमास की गतिविधियों पर नजर रखती है। अब उन्होंने क्रिश्चियन धर्म स्वीकार कर लिया है और अमेरिका में रहते हैं।
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