पीआर और पब्लिसिटी के सहारे नहीं, काम से बनती है पहचान: Meenakshi Seshadri
मुंबई। बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि ने फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ते पीआर कल्चर और पब्लिसिटी स्टंट को लेकर खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि आजकल कई कलाकार अपने काम से ज्यादा अतरंगी फैशन, विवादित बयानों और मीडिया मैनेजमेंट के जरिए चर्चा में बने रहने की कोशिश करते हैं, लेकिन वह खुद इस तरह की संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं। उनका मानना है कि किसी भी कलाकार की असली पहचान उसके काम और प्रतिभा से बनती है। हाल ही में अपने एक साक्षात्कार में मीनाक्षी शेषाद्रि ने कहा कि मनोरंजन जगत में ऐसे कई लोग हैं, जो बिना किसी खास उपलब्धि के भी लगातार सुर्खियों में बने रहते हैं। उन्होंने फिल्म ‘द डर्टी पिक्चर’ का जिक्र करते हुए कहा कि उस फिल्म का एक संवाद आज भी पूरी तरह सच साबित होता है कि यहां सिर्फ मनोरंजन चलता है। उनके मुताबिक कुछ कलाकार मीडिया और प्रचार के सहारे खुद को चर्चा में बनाए रखते हैं, लेकिन वह हमेशा अपने काम के दम पर पहचान बनाने में विश्वास रखती हैं। मीनाक्षी ने कहा कि सफलता पाने का सबसे सही तरीका अच्छा काम करना है। उन्होंने अंग्रेजी की मशहूर कहावत “सक्सेस इज़ द बेस्ट सक्सेस” का जिक्र करते हुए कहा कि जब कोई कलाकार मेहनत और कला के दम पर सफलता हासिल करता है, तो बाकी रास्ते अपने आप खुलते चले जाते हैं। उनके अनुसार कलाकार का पहला लक्ष्य दर्शकों का दिल जीतना होना चाहिए, न कि कृत्रिम प्रचार के जरिए लोकप्रियता हासिल करना। अभिनेत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब फिल्म इंडस्ट्री में पीआर गेम, सोशल मीडिया इमेज बिल्डिंग और ट्रोलिंग को लेकर लगातार बहस चल रही है।
हाल ही में अभिनेत्री अमीषा पटेल ने भी इसी मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि भारत में कलाकारों को हॉलीवुड सितारों से भी ज्यादा बेरहमी से ट्रोल किया जाता है, जो बेहद दुखद है। अमीषा पटेल ने कहा था कि सोशल मीडिया पर लोगों की मानसिकता अब दूसरों को नीचे गिराने वाली होती जा रही है। उन्होंने बड़े इवेंट्स में अभिनेत्रियों के कपड़ों, लुक और स्टाइल को लेकर होने वाली आलोचना पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक लोग किसी कलाकार के काम की तारीफ करने के बजाय उसकी कमियां निकालने में ज्यादा दिलचस्पी लेने लगे हैं। मीनाक्षी शेषाद्रि के बयान को सोशल मीडिया पर काफी समर्थन मिल रहा है। कई लोग मानते हैं कि आज के दौर में जहां सोशल मीडिया प्रचार और इमेज मैनेजमेंट का बड़ा माध्यम बन चुका है, वहां कलाकारों के लिए अपनी प्रतिभा और काम के जरिए अलग पहचान बनाना पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।
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