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सिंधु जल संधि पर भारत का फैसला Pakistan के लिए गंभीर चुनौती

सिंधु जल संधि पर भारत का फैसला Pakistan के लिए गंभीर चुनौती

-बिलावल भुट्टो ने दियामर-भाशा परियोजना में तेजी की मांग की -भारत पर पानी को ‘हथियार’ बनाने का लगाया आरोप

इस्लामाबाद। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने दियामर-भाशा बांध परियोजना को जल्द पूरा करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए इसे पाकिस्तान की जल और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया है। दियामर में आयोजित एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत द्वारा सिंधु जल संधि पर लगाए गए अस्थायी रोक संबंधी कदम की आलोचना की और इसे पाकिस्तान के लिए गंभीर चुनौती बताया। बिलावल भुट्टो ने कहा कि पाकिस्तान को अपनी जल भंडारण और ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से आग्रह किया कि दियामर-भाशा बांध परियोजना को प्राथमिकता देते हुए इसके निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए। उनके अनुसार यह परियोजना न केवल बिजली उत्पादन बढ़ाएगी बल्कि कृषि क्षेत्र को भी लाभ पहुंचाएगी। दियामर-भाशा बांध पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में निर्माणाधीन एक बड़ी जलविद्युत परियोजना है। लगभग 4,500 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना की अनुमानित लागत 15 अरब डॉलर बताई जाती है। पाकिस्तान का दावा है कि इसके पूरा होने से जल भंडारण क्षमता बढ़ेगी और लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई में मदद मिलेगी। परियोजना में चीन की महत्वपूर्ण भागीदारी है।

रिपोर्टों के अनुसार, इसमें चीनी कंपनियों और पाकिस्तान की संस्थाओं का संयुक्त निवेश शामिल है। दूसरी ओर, भारत इस परियोजना पर लगातार आपत्ति जताता रहा है। भारत का कहना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा है और उस क्षेत्र में किसी भी निर्माण गतिविधि से संबंधित उसकी संप्रभुता संबंधी चिंताएं हैं। सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में तनाव बढ़ा है। पाकिस्तान का मानना है कि संधि से जुड़े किसी भी कदम का उसके जल संसाधनों पर प्रभाव पड़ सकता है, जबकि भारत लंबे समय से संधि की समीक्षा और उसके प्रावधानों पर पुनर्विचार की आवश्यकता की बात करता रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि जल संसाधन, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में भारत-पाकिस्तान संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। ऐसे में दियामर-भाशा जैसी परियोजनाएं और सिंधु जल संधि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चर्चा के प्रमुख विषय बने रह सकते हैं।

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