Iran में फूटा महंगाई बम, क्या फिर सड़कों पर उतरेगी भूखी जनता?
तेहरान। आठ महीने से जारी युद्ध के कारण ईरान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। देश में महंगाई दर 70 प्रतिशत के आसपास है, जबकि खाने-पीने की चीजों की कीमतें 128 प्रतिशत से भी ऊपर हैं। ईरानी मुद्रा रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर है, जिससे लोगों की क्रय शक्ति न के बराबर रह गई है। औसत मासिक वेतन करीब 125 डॉलर है, जबकि बुनियादी खर्च 450 डॉलर तक पहुंच जाता है, जिससे पेट्रोल, भोजन और रोजमर्रा की वस्तुएं आम परिवारों की पहुंच से बाहर हो गई हैं। सोशल मीडिया पर लोग रसीदें और पुरानी कीमतों की तुलना करके अपनी परेशानी दिखा रहे हैं। अमेरिका ने ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट शुरू किया है, जिसका लक्ष्य ईरान की अर्थव्यवस्था और खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के वित्तीय स्रोतों को काटना है, क्योंकि आईआरजीसी देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है। रिपोर्टों के मुताबिक, कई आईआरजीसी सदस्यों को महीनों से वेतन नहीं मिला है और वे परिवार के लिए भोजन मांगने को मजबूर हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इससे आईआरजीसी का मनोबल टूट सकता है और सड़क पर क्रांति की संभावना बढ़ सकती है। आर्थिक संकट पहले भी प्रदर्शनों का कारण बना है, जिन्हें सख्ती से कुचला गया है। अमेरिकी इंवेस्टिगिव जर्नलिस्ट के मुताबिक, ईरान में हालात ऐसे हैं कि लोगों को गैस और तेल पाने के लिए लंबी-लंबी लाइनों में घंटों खड़े रहना पड़ रहा है और सामान, खाना व दूसरे आइटम्स की परचेजिंग पावर में गिरावट आई है। हालांकि, सरकार और आईआरजीसी अभी भी दमन की क्षमता रखते हैं। लोग उनसे नाराज जरूर हैं, लेकिन संगठित और लंबे समय तक चलने वाला विद्रोह अभी दूर लगता है, क्योंकि कई लोग डर, थकान और दमन के अनुभव से चुप रहना पसंद करते हैं। हालांकि, अगर महंगाई और कमी इसी तरह बढ़ती रही और आईआरजीसी कमजोर पड़ता दिखा, तो असंतोष फूट सकता है। सोशल मीडिया पहले से ही जनता की आवाज बन चुका है। ईरान की स्थिति नाजुक है; आर्थिक दबाव क्रांति का बीज बो सकता है, लेकिन इसकी सफलता दमन की ताकत और जनता की एकजुटता पर निर्भर करेगी।
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