अपनी आर्थिक लाइफलाइन Kharg Island को बचाने में जुटा ईरान...Trump प्रशासन की ढेड़ी नजर इस पर
अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम लगाए गए
तेहरान। होर्मुज क्षेत्र में एक नया तनावपूर्ण फ्लैशपॉइंट उभरता दिख रहा है, जहां ईरान ने अपने बेहद महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप की सुरक्षा को तेजी से मजबूत करना शुरु किया है। खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीप है, जहां से ईरान अपने करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात करता है। इसकारण खार्ग द्वीप को ईरान की आर्थिक जीवनरेखा माना जाता है। यदि इस द्वीप को नुकसान पहुंचता है या यह दुश्मन के कब्जे में जाता है, तब ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लग सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के हफ्तों में ईरान ने द्वीप पर सैन्य तैयारियां काफी बढ़ा दी हैं। अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की है, उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम लगाए गए हैं और तटीय क्षेत्रों में माइन्स (बारूदी सुरंगें) बिछाई जा रही हैं। ये माइन दो प्रकार की हैं एक पैदल सैनिकों को रोकने के लिए और दूसरी भारी वाहनों व टैंकों को नुकसान पहुंचाने के लिए। विशेष रूप से उन संभावित स्थानों पर इन्हें लगाया गया है जहां से समुद्र के रास्ते कोई हमला हो सकता है। दरअसल ईरान की यह तैयारी मुख्य रूप से अमेरिका द्वारा संभावित जमीनी हमले की आशंका के कारण हो रही है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रंप प्रशासन के दौरान इस विकल्प पर विचार किया गया था कि खार्ग द्वीप पर कब्जा कर ईरान पर दबाव बनाया जाए।
इसका उद्देश्य ईरान को होर्मुज क्षेत्र खोलने के लिए मजबूर करना हो सकता है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। इस जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ सकता है। हालांकि, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि खार्ग द्वीप पर हमला करना बेहद जोखिम भरा होगा। ईरान ने वहां बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था बना रखी है। हाल ही में (कंधे पर रखकर चलाए जाने वाले मिसाइल सिस्टम) भी तैनात किए गए हैं, जो हेलिकॉप्टर और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों के लिए बड़ा खतरा हैं। ऐसे में यदि अमेरिकी सैनिक वहां उतरते हैं, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अमेरिका के भीतर भी इस रणनीति को लेकर मतभेद हैं। कुछ विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि केवल इस द्वीप पर कब्जा करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। ईरान की क्षेत्रीय पकड़ और तेल बाजार पर उसका प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। ऐसे में जोखिम और संभावित लाभ के बीच संतुलन स्पष्ट नहीं है। इस बीच, अमेरिकी सेना ने ईरान की इन गतिविधियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। पहले अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था, लेकिन तेल संरचनाओं को जानबूझकर बचाया गया।
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