Supreme Leader की मंजूरी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता को तैयार
तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जानकारी के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से हरी झंडी मिलने के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में संभावित वार्ता के लिए तैयार है। यदि यह बैठक तय होती है, तो अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेन्स आज मंगलवार को ही उच्च स्तरीय टीम के साथ इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब मौजूदा संघर्ष विराम की समयसीमा समाप्त होने वाली है। वार्ता के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विट्कॉफ और दामाद जे कुशनेर भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच “गहरा ऐतिहासिक अविश्वास” अभी भी बना हुआ है, जो वार्ता की राह को जटिल बनाता है। पेज़ेशकियन ने अमेरिका पर भड़काऊ गतिविधि करने और विरोधाभासी बयान देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है। उन्होंने दो टूक कहा, “ईरानी जनता दबाव में झुकने वाली नहीं है।” दूसरी ओर, मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने संकेत दिया है कि तेहरान इस वार्ता पर “सकारात्मक विचार” कर रहा है। बैठक में ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलिबफ नेतृत्व कर सकते हैं। ईरान ने वार्ता के लिए प्रमुख शर्त के रूप में होर्मुज पर अमेरिकी नाकाबंदी हटाने की मांग रखी है।
वहीं, ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, हालांकि उन्होंने ईरानी नेताओं से सीधे मिलने की इच्छा भी जताई है। ट्रंप के हालिया बयान से स्थिति कुछ उलझी भी नजर आई। उन्होंने पहले कहा था कि वेंस तत्काल रवाना होंगे, लेकिन बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यात्रा मंगलवार को ही संभव है, वह भी वार्ता की पुष्टि के बाद। समझौता नहीं तो सैन्य कार्रवाई होगी: ट्रंप फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद शुरू हुए इस संघर्ष को रोकने के लिए यह दूसरा बड़ा प्रयास होगा। ट्रंप ने संघर्ष विराम की समयसीमा को 24 घंटे बढ़ाते हुए इसे इस्लामाबाद वार्ता के लिए अहम बताया है। हालांकि, ट्रंप ने चेतावनी भी दी है कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है। इसके बावजूद उन्होंने कहा, “हम जल्दबाजी में कोई खराब समझौता नहीं करेंगे।” गौरतलब है कि इससे पहले 21 घंटे चली बातचीत विफल रही थी, जिसमें ईरान ने परमाणु संवर्धन रोकने की अमेरिकी मांग ठुकरा दी थी।
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