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America को नया शांति प्रस्ताव, होर्मुज से नाकेबंदी हटाने और दो चरणों में वार्ता की पेशकश

America को नया शांति प्रस्ताव, होर्मुज से नाकेबंदी हटाने और दो चरणों में वार्ता की पेशकश

तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ जारी टकराव को टालने के लिए एक नया शांति प्रस्ताव पेश किया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अपना यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस भेज दिया है। इस नए शांति प्लान में ईरान ने दो चरणों में बातचीत का सुझाव दिया है, जिसमें सबसे पहली और प्रमुख शर्त स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) से नाकेबंदी हटाने और युद्ध को तुरंत समाप्त करने की रखी गई है। ईरान द्वारा भेजे गए दो-चरणीय प्रस्ताव के मुताबिक, पहले चरण में अमेरिका को स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को खोलना होगा और वहां जारी सैन्य नाकेबंदी को खत्म करना होगा। ईरान का मानना है कि जब तक यह सामरिक जलमार्ग व्यापार और आवाजाही के लिए सुरक्षित नहीं होता, तब तक किसी भी गंभीर कूटनीतिक वार्ता का आधार तैयार नहीं हो सकता। इसके साथ ही, ईरान ने युद्धविराम की अवधि बढ़ाने या जंग को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है। दूसरे चरण में, स्थितियां सामान्य होने के बाद, ईरान परमाणु हथियार कार्यक्रम जैसे विवादास्पद मुद्दों पर मेज पर बात करने को तैयार है। ईरान ने इस दौरान सुरक्षा की गारंटी, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा और होर्मुज को लेकर एक नए कानूनी ढांचे के निर्माण की भी मांग की है।

यह कूटनीतिक हलचल तब हुई है, जब शांति वार्ता लगभग ठप पड़ी हुई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान शांति चाहता है, तब वह सीधे संपर्क कर सकता है, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने नहीं दिए जाएंगे। इससे पहले अमेरिका ने ईरान के पुराने प्रस्तावों को नाकाफी बताकर अपनी टीम भेजने का विचार त्याग दिया था। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची बेहद सक्रिय नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और शीर्ष सैन्य अधिकारियों से चर्चा करने के बाद अराघची अब रूस रवाना हुए हैं, जहां वे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करने वाले है। हालांकि, इस नए प्रस्ताव पर सहमति बनने की उम्मीद फिलहाल कम ही दिख रही है। अमेरिका की स्पष्ट शर्त है कि ईरान को कम से कम 10 वर्षों के लिए अपना परमाणु संवर्धन कार्यक्रम रोकना होगा और मौजूदा परमाणु भंडार को देश से बाहर करना होगा। इन कड़ी शर्तों के बिना अमेरिका युद्धविराम के लिए तैयार नहीं है, जिससे इस नए शांति प्रस्ताव के भविष्य पर संशय बना हुआ है।

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