पानी में तैरने और हवा में उड़ान भरने वाला Robot विकसित
- एमआईटी के वैज्ञानिकों का कमाल
वाशिंगटन। अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के वैज्ञानिकों ने एक अत्यंत अनूठा और अभिनव रोबोट विकसित किया है, जो बिना किसी प्रोपेलर की सहायता के पानी के भीतर तैर सकता है और सीधे जल की सतह से उड़ान भरकर हवा में पहुंच सकता है। गोताखोर पक्षियों की शारीरिक कार्यप्रणाली से प्रेरित यह रोबोट समुद्री अनुसंधान, पर्यावरण की निगरानी और दुर्गम इलाकों से महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आंकड़े जुटाने के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकता है। शोधकर्ताओं का दृढ़ विश्वास है कि यह अत्याधुनिक तकनीक भविष्य में समुद्री विज्ञान और पर्यावरण अनुसंधान की पूरी कार्यप्रणाली को बदल कर रख देगी।
इस रोबोट का अनूठा डिजाइन उन विशेष पक्षियों से प्रेरित है, जो पानी में गहरा गोता लगाकर शिकार करते हैं और फिर उसी गति से हवा में उड़ान भर लेते हैं। सामान्य तौर पर पानी और हवा दो अलग-अलग घनत्व वाले माध्यम हैं, इसलिए दोनों परिस्थितियों में एक ही तकनीक से रोबोट का संचालन करना बेहद जटिल और कठिन माना जाता है। लेकिन प्रकृति में पफिन, किंगफिशर, लून और पेट्रेल जैसे पक्षी इस प्रक्रिया को बेहद सहजता से अंजाम देते हैं। इन्हीं पक्षियों की उड़ान और तैरने की अद्भुत क्षमता का गहराई से अध्ययन कर वैज्ञानिकों ने इस मशीन को तैयार किया है।
एमआईटी के प्रोफेसर राफेल जुफेरी और उनकी विशेषज्ञ टीम ने करीब दो वर्षों तक इन पक्षियों की गतिविधियों का सूक्ष्म विश्लेषण किया। इस अध्ययन में पाया गया कि ये पक्षी हवा में प्रति सेकंड लगभग 10 बार अपने पंख फड़फड़ाते हैं, जबकि पानी के भीतर यह गति घटकर करीब चार से पांच बार रह जाती है। इसी प्राकृतिक सिद्धांत को इस नए रोबोट में भी अपनाया गया है। परीक्षणों में यह भी सामने आया कि बड़े पंख पानी के भीतर उम्मीद से काफी कम अवरोध उत्पन्न करते हैं, जिससे उड़ान के लिए आवश्यक बड़े विंग्स का उपयोग इस रोबोट में संभव हो सका।
आधे पाउंड से भी कम वजन वाले इस हल्के रोबोट में एक केंद्रीय ढांचा, छोटी बैटरी, जलरोधक मोटर और दिशा को नियंत्रित करने वाली एक छोटी पूंछ लगाई गई है। इसके पंख विशेष झिल्लीदार सामग्री से बने हैं, जिन पर एक ऐसी कोटिंग की गई है जो पानी को तेजी से हटाकर तुरंत उड़ान भरने में मदद करती है। रोबोट के इलेक्ट्रॉनिक हिस्सों को भारी-भरकम जलरोधक आवरण में बंद करने के बजाय उन पर सिलिकॉन की बेहद पतली परत चढ़ाई गई है, जिससे इसका वजन नियंत्रित रहा। प्रयोगशाला के टैंक और स्विट्जरलैंड की जिनेवा झील में हुए सफल परीक्षणों के दौरान इस रोबोट ने लगभग आधा मीटर की गहराई से तैरते हुए पानी की सतह को पार किया और सीधे हवा में उड़ान भरी। भविष्य में ऐसे रोबोटों का उपयोग समुद्री प्रदूषण, प्रवाल भित्तियों और हिमखंडों की सुरक्षित व तीव्र निगरानी के लिए किया जा सकेगा।
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